महावीर नगर तृतीय निवासी ,स्वर्गीय हेमाराम उदेनिया का फरवरी 2026 में निधन होने के बाद उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने उनका देहदान संपन्न कराया था। उनके सेवा और मानवता के इस महान निर्णय ने पूरे परिवार को समाजहित के कार्यों से जोड़ दिया।
13 जुलाई को उनके 59वें जन्मदिवस के अवसर पर परिवार ने उन्हें अनूठी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देहदान के संकल्प लिए। उनकी पुत्री अनामिका एवं उनके पति महेश नवल, पुत्री प्रमिला एवं उनके पति दिनेश खोलिया तथा दिनेश जी की माताजी श्रीमती शकुंतला देवी ने शाइन इंडिया फाउंडेशन के साथ विधिवत देहदान संकल्प-पत्र भरकर स्वर्गीय हेमाराम उदेनिया के आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
इसी प्रेरणा से भीनमाल (जालौर) निवासी अचलाराम जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कमला बोहरा ने भी अपना देहदान संकल्प-पत्र भरकर इस मानव सेवा के अभियान से जुड़ने का निर्णय लिया।
इस पूरे अभियान की सबसे प्रेरणादायी बात यह रही कि स्वर्गीय हेमाराम उदेनिया की धर्मपत्नी श्रीमती चंपा उदेनिया स्वयं अपने पति के देहदान के बाद लगातार अपने परिजनों, मित्रों एवं परिचितों को देहदान के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनके सतत प्रयासों और प्रेरणा के परिणामस्वरूप इन सभी लोगों ने देहदान का संकल्प लिया। यह इस बात का जीवंत उदाहरण है कि एक व्यक्ति का महान निर्णय अनेक लोगों के जीवन में सेवा और संवेदनशीलता का नया संकल्प जगा सकता है।
इस अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ ने सभी संकल्पकर्ताओं एवं उदेनिया परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, "स्वर्गीय हेमाराम उदेनिया जी का देहदान केवल चिकित्सा शिक्षा के लिए एक अमूल्य योगदान नहीं है, बल्कि उनके परिवार द्वारा उनके जन्मदिन को देहदान संकल्प दिवस के रूप में मनाना पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायी संदेश है। विशेष रूप से श्रीमती चंपा उदेनिया का समर्पण और जागरूकता अभियान यह सिद्ध करता है कि यदि परिवार संकल्प ले तो एक देहदान अनेक नए देहदानियों को जन्म दे सकता है। हमें विश्वास है कि ऐसे प्रेरक उदाहरणों से समाज में देहदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी और अधिक से अधिक लोग मृत्यु के बाद भी मानव सेवा का संकल्प लेंगे।"
शाइन इंडिया फाउंडेशन ने सभी संकल्पकर्ताओं का अभिनंदन करते हुए इसे मानवता, सेवा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया तथा आमजन से भी नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान जैसे महादानों के लिए आगे आने का आह्वान किया।