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उदयपुर में पहली बार सजेगा “वन मेला-2026”

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11 Jan 26
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उदयपुर में पहली बार सजेगा “वन मेला-2026”

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में पहली बार वन विभाग की पहल पर “वन मेला उदयपुर-2026” का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह दो दिवसीय वन मेला 17 व 18 जनवरी 2026 को ऐतिहासिक सज्जनगढ़, उदयपुर में होगा। मेले का उद्देश्य उदयपुर संभाग की समृद्ध जैव विविधता, वन उत्पादों एवं पारंपरिक जनजातीय ज्ञान से आमजन को परिचित कराना है।

‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा सशक्त मंच
संभागीय मुख्य वन संरक्षक सुनील चिद्री ने बताया कि यह आयोजन माननीय प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को समर्पित है, जिसके तहत क्षेत्र में पाई जाने वाली महत्वपूर्ण वनस्पतियों से निर्मित औषधीय, जैविक एवं पूर्णतः ऑर्गेनिक वन उत्पादों का प्रदर्शन, प्रसार और विपणन किया जाएगा। वन उत्पादों के प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन एवं विपणन की जानकारी भी आमजन को दी जाएगी, जिससे स्थानीय समुदायों को आजीविका के नए अवसर मिल सकें।

‘पंच गौरव’ के तहत प्रदर्शित होंगे संभाग के विशिष्ट उत्पाद
मेले में उदयपुर संभाग के सभी जिलों से माननीय मुख्यमंत्री की भावना के अनुरूप ‘पंच गौरव’ परिकल्पना के अंतर्गत चयनित विशिष्ट एवं वांछित उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी, विश्व प्रकृति निधि सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं के महत्वपूर्ण वन उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय भी किया जाएगा।

वन एवं वन्यजीव संरक्षण पर आधारित विशेष स्टॉल
वन मेले में वन उत्पादों के साथ-साथ स्थानीय एवं पारंपरिक उत्पाद, वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित पुस्तकें, जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान पर आधारित सामग्री की विशेष स्टॉल भी लगाई जाएंगी, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएंगी।

प्रकृति, परंपरा और प्रगति का संगम
“वन मेला उदयपुर-2026” न केवल वन उत्पादों का प्रदर्शन है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। संभागीय मुख्य वन संरक्षक श्री चिद्री ने शहरवासियों, ग्रामीण जनों एवं देश विदेश से आने वाले पर्यटकों से इस दुर्लभ और विशिष्ट वन मेले में आकर उदयपुर संभाग की जैव विविधता के खजाने से रूबरू होने तथा स्थानीय जनजातियों द्वारा सदियों से सहेजे गए पारंपरिक ज्ञान से निर्मित वन उत्पादों को प्रोत्साहन देने की अपील की है।
 


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