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स्वर कोकिला लता मंगेशकर को सुरसाधकों ने दी भावभीनी स्वरांजलि, 30 से अधिक कलाकारों ने बिखेरा सुरों का जादू

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07 Feb 26
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स्वर कोकिला लता मंगेशकर को सुरसाधकों ने दी भावभीनी स्वरांजलि, 30 से अधिक कलाकारों ने बिखेरा सुरों का जादू

उदयपुर। भारत रत्न लता मंगेशकर की चतुर्थ पुण्यतिथि के अवसर पर 'सुरों की मंडली' संस्था की ओर से अशोका पैलेस के मधुश्री बैंक्वेट हॉल में एक भव्य संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया गया। देर रात तक चले इस आयोजन में शहर के 30 से अधिक सुरसाधकों ने लता मंगेशकर के अमर गीतों की प्रस्तुतियाँ देकर उन्हें अपनी सच्ची स्वरांजलि अर्पित की।

संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी बताया कि संगीत के माध्यम से आम जनमानस को जोड़ना और सांस्कृतिक व सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देना संस्था का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी दिनों में मेवाड़ी और सिंधी भाषा में भी विशेष संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि 'जेन-जी' (आज की युवा पीढ़ी) अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रंजना भाटी रहीं, जिन्होंने कलाकार चंद्रप्रकाश चितौड़ा द्वारा लता मंगेशकर के जीवन पर तैयार की गई सूक्ष्म पुस्तिका का अनावरण किया।

कार्यक्रम की शुरुआत गीता सिंह राठौड़ और मातृशक्ति द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद सचिव अरुण चौबीसा ने "लग जा गले", रमेश दतवानी ने "तू कितनी अच्छी है", राजकुमार बापना ने "ये दिल और उनकी निगाहों के साये" और रंजना भाटी ने "मेरा दिल ये पुकारे आजा" जैसे गीतों से समां बांध दिया। इसके साथ ही महावीर जैन, ईश्वर जैन, गोपाल गोठवाल, नारायण लोहार, एच. काज़ी, नारायण सालवी, डॉ० ईनू रावल, मधुबाला चैनानी, शगुन जैन, हेमा जोशी, दिलीप गभरानी, संदीप बंसल, ज्योति मोदियानी, अम्बालाल साहू, मनोहर मुखिया और नीलम पटवा सहित कई कलाकारों ने बेहतरीन प्रस्तुतियाँ दीं।

संयोजक रमेश दतवानी ने बताया कि सेलू गांव में मोयेंद्र फाउंडेशन द्वारा दी गई जमीन पर प्रस्तावित गौशाला, राधे कृष्ण मंदिर, हैप्पी होम और संगीत संग्रहालय के स्थल पर जल्द ही सदस्यों के लिए एक संगीतमय पिकनिक आयोजित की जाएगी। गौरतलब है कि इस स्थल का भूमि पूजन गत 26 जनवरी को किया जा चुका है।

मुकेश माधवानी ने आगामी 16 फरवरी को महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले "शिव स्तुति" कार्यक्रम और 4 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए "बाल शिव" प्रतियोगिता की जानकारी दी। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे अपने बच्चों को सनातन संस्कृति से रूबरू करवाने के लिए इस प्रतियोगिता में अधिक से अधिक संख्या में भाग दिलाएं। कार्यक्रम को सफल बनाने में राजकुमार बापना, ईश्वर जैन और अन्य सदस्यों का विशेष योगदान रहा।


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