उदयपुर, शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर ओरिएण्टल पैलेस के रिवाह सभागार में आयोजित विशेष कार्यक्रम का शुभारंभ श्री नरेश शर्मा के प्रारंभिक मंच संचालन से हुआ | परंपरानुसार कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती कुसुम त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत ईश वंदना से की गई, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके उपरांत मंच संचालन की बागडोर श्रीमती डॉ. श्रद्धा गट्टाणी ने सँभाली | उन्होंने राज्य सरकार द्वारा सामाजिक कार्यों में सदैव अग्रणी रहने वाले मुस्कान क्लब के उपाध्यक्ष श्री सूरज मल पोरवाल को मंच पर आमंत्रित किया | उनका मुस्कान कार्यकारिणी के सदस्यों द्वारा विधिवत अभिनंदन किया गया | तत्पश्चात त्रैमासिक “मधुर मुस्कान” पत्रिका (अक्टूबर - दिसंबर 2025) का विमोचन संपन्न हुआ |
श्रीमती कौशल्या गट्टाणी के प्रेरक उद्बोधन के बाद, मुस्कान के नाम को सार्थक करते हुए, मार्तण्ड फाउंडेशन द्वारा हास्य नाटक “सिरफिरों का घर” का मनमोहक मंचन प्रस्तुत किया गया | इस नाटक के सिद्धहस्त कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट अभिनय कला से दर्शकों को भावविभोर कर दिया |
परिवार केंद्रित इस नाटक में “आई (माँ)” की भूमिका में श्रीमती किरण जाह्नवी, “बाबा (पिता)” की भूमिका में श्री विलास जाह्नवी, तथा “बंडू (पुत्र)” की भूमिका में श्री मनीश शर्मा के जीवंत अभिनय ने प्रत्येक दृश्य को जीवंत बना दिया |
नाटक की विशेषता यह रही कि यह केवल एक हास्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय संस्कारों और मूल्यों का जीवंत दस्तावेज भी था |
एक दृश्य में बाबा द्वारा बंडू को आई से ऊँची आवाज में बात करने पर डाँटना, महाराणा प्रताप के शौर्य का चित्रण, अमर सिंह के माध्यम से भारतीय आदर्शों का प्रसंग, तथा रसखान के दोहों और जीवन चरित्र का समावेश -इन सभी ने कथा के प्रवाह को और अधिक अर्थपूर्ण बना दिया |
नाटक का समापन भावपूर्ण गीत “किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार” के साथ हुआ, जिसने दर्शकों के मन को गहराई से छू लिया | अंत में बंडू ने यह जानकारी दी कि देश-विदेश में मंचित इस नाटक के मुख्य पात्र “बाबा” को राष्ट्रपति सम्मान से अलंकृत किया जाएगा |