उदयपुर | आनंद मार्ग प्रचारक संघ, उदयपुर के भुक्ति प्रधान डॉ. एस. के. वर्मा ने बताया की 12 फरवरी 1973 को मार्गगुरु श्री श्री आनन्दमूर्तिजी द्वारा सम्पूर्ण मानवता के उद्धार हेतु दिए गए सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक सिद्धांतों को नष्ट करने हेतु विरोधियों एवं पाप शक्तियों द्वारा पटना (बिहार) के बांकीपुर जेल में उन्हें दवा के नाम पर जहर दिया गया. इस विष प्रयोग की न्यायिक जांच हेतु उनके द्वारा सभी सक्षम अधिकारियों को लिखित में आवेदन के बावजूद उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं लिए जाने के विरोध में 5 वर्ष, 4 महीना और 2 दिन का लम्बा उपवास रखा. वर्ष 1978 में न्यायालय द्वारा सभी आरोपों से मुक्त होकर वे ससम्मान रिहा हुए जो यह प्रदर्शित करता है की अन्याय व अधर्म के विरुद्ध धर्म सदा विजयी होता है. गुरुदेव के सुरक्षित बच जाने पर पूरे विश्व में मार्ग अनुयायियों द्वारा पाप शक्ति के विरुद्ध अनवरत संग्राम के संकल्प और जरूरतमंदों की सेवा के रूप में  12 फरवरी को नीलकंठ दिवस मनाया जाता है.
इस वर्ष भी गुरुवार दिनांक 12 फरवरी को आनंद मार्ग प्रचारक संघ, उदयपुर डायोसिस यूनिट द्वारा टेकरी-मादरी रोड स्थित जागृति पर धर्मचक्र का विधिवत आयोजन किया गया जिसमें प्रभात संगीत गायन के पश्चात अष्टाक्षर सिद्ध महामंत्र 'बाबा नाम केवलम' कीर्तन हुआ. तपश्चात ईश्वर प्रणिधान, गुरुपूजा, वर्णाध्यान और स्वाध्याय पाठ हुआ. इस अवसर पर नारायण सेवा भी की गयी जिसके तहत 7 किलो बूंदी के प्रसाद का वितरण बच्चों, वृद्ध जनों और श्रमिकों के बीच किया गया. संभाग के सभी साधकों ने इस अवसर पर आध्यत्मिक नैतिकता के पथ पर चलते हुए अन्याय के विरुद्ध सदैव संग्राम का संकल्प लिया.