उदयपुर | त्रिमूर्ति शिव जयंती ब्रह्माकुमारी परंपरा में महाशिवरात्रि के दिन मनाया जाता है। यह कलियुग की अज्ञान रात्रि में ज्ञान ज्योति जलाने का प्रतीक है।
परमात्मा शिव निराकार ज्योति स्वरूप हैं, जो धर्मग्लानि पर साकार होकर राजयोग सिखाते हैं, विकारों का संहार कर नई सतयुगी सृष्टि रचते हैं| गीता के वचनानुसार, वे साधुओं की रक्षा, दुष्टों का नाश और धर्म स्थापना के लिए युगांत में अवतरित होते हैं।
मीडिया समन्वयक प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया की विगत एक सप्ताह के कार्यक्रम के अंतर्गत शोभायात्रा, राजयोग ध्यान,
प्रेरणादायी प्रवचन एवं 
शिव ध्वजारोहण प्रमुख रहे। इसके मूल में प्रकृति परिवर्तन के संकेतों के बीच पवित्रता और ज्ञान ज्योति जगाने का आह्वान सर्वोपरि रहा |
बी के रीटा कुमारी ने बताया की आज के कार्यक्रम में उदयपुर संभाग के सभी केंद्र से ब्रह्मा भाई व ब्रह्मा कुमारी बहनो ने उत्साह से भाग लिया | इस पर्व का आध्यात्मिक संदेश बुराइयां (काम, क्रोध आदि) शिव को अर्पित कर आत्म-शुद्धि, पवित्रता और सहज राजयोग से हम सभी देवतुल्य बनें। यह आत्मिक शांति, सकारात्मकता और विश्व कल्याण का उपहार है। भोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ |