उपरोक्त संस्थान में “नशा मुक्ति” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन इनर व्हील क्लब द्वारा आयोजित किया गया। तोते की कहानी जिसमें एक पंडित के घर रहा तो सबसे "नमस्ते" कहता और जो कसाई के घर रहा वो सबसे "मारो काटो" कहता बताते हुए डॉ पी सी जैन ने कहा कि शिक्षक जैसी शिक्षा देगा वैसा ही शिक्षार्थी बनेगा। अर्थात शिक्षक को नशा मुक्त रहने का आदर्श  प्रस्तुत करना होगा।उन्होंने विद्यार्थी के नशेड़ी  बनने पर स्वभाव में परिवर्तन,पढ़ाई में पीछे रह जाना,अचानक आक्रामक हो जाना,नए नए मित्र बनाना,कक्षा में पीछे बैठकर नींद निकालना ,रहनसहन के प्रति लापरवाह होने इत्यादि लक्षणों का वर्णन कर नशेड़ी की जल्दी पहचान करना बताया।उन्होंने  शिक्षकों  को इन विभिन्न लक्षणों  के आधार पर नशेड़ी बालक का उपचार कैसे करें यह बताया।इन बालकों को सबके सामने नहीं अकेले में बातचीत द्वारा ईलाज करना चाहिए।नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया तथा स्वस्थ ,नशामुक्त जीवन हेतु यौगिक एक्सरसाइज  कार्रवाई। "रोगों का संकट आने वाला है नशे को छोड़ों रे"।गीत गवाया।तथा उन्हें स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित किया ।
सबसे नशा मुक्त हेतु शपथ दिलाई।
डॉ. जैन ने कहा कि “यदि हम एक भी युवा को नशे से बचा लें तो हमारा प्रयास सार्थक होगा।"
उन्होंने इधर इनर व्हील क्लब के अध्यक्ष  चंद्रकला कोठारी एवं सचिन बबीता जैन का आभार व्यक्त किया कि वह सक्रिय रूप से नशा मुक्ति अभियान चला रही है।
प्राचार्य हनुमान सहाय शर्मा ने नशा मुक्ति अभियान में भावी शिक्षकों को सक्रिय बने रहने का विभिन्न उदाहरण द्वारा आह्वान किया और सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। महाविद्यालय में एक "नशा मुक्ति प्रेरक समूह" भी बनाया जो नशा मुक्ति अभियान को सतत चलाता रहेगा।
प्रधानाचार्य  श्री हनुमान सहाय शर्मा 
विद्यार्थी नाम सुनीता राठौर ,कविता सोलंकी रामाराम देवासी ,विरमाराम चौधरी ,वीरेंद्र यशस्वी ,नितिशा पायल, विकास इसमें सम्मिलित हैं।
 चंद्र कला कोठारी, अध्यक्ष,इनर व्हील क्लब उदयपुर