उदयपुर। देश में जनजातीय विरासत, जनजाति कलारूपों और मौखिक परम्पराओं सहित विभिन्न जनजातीय हस्तकला एवं मुखौटा कला संरक्षण लिये माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से मार्च 2026 में “राज्य स्तरीय मुखौटा कला“ की कार्यशाला का आयोजन 12 से 18 मार्च, 2026 तक क्षेत्रीय सांस्कृतिक स्त्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी), उदयपुर में किया जा रहा है।
निदेशक ओ. पी. जैन ने बताया कि मुखौटा कला आदिवासी संस्कृति के अनु-ुनवजयठानों, नृत्यों और
लोक नाट्य (जैसे गवरी) का अभिन्न अंग है। राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्र (टीएसपी), माडा (माडा) एवं बिखरी जनजाति क्षेत्रों से कुल 32 कलाकार इस सात दिवसीय कार्यशाला में भाग लेंगे। कलाकार काष्ठ (लकड़ी) और पेपर मेसी जैसी विशिष्ट सामग्रियों का उपयोग कर पारंपरिक मुखौटे तैयार करेंगे।
निदेशक श्री ओ. पी. जैन ने बताया कि इन कार्य-रु39यालाओं में निर्मित सभी कलाकृतियों को भविष्य में संग्रहालयों और प्रद-रु39र्यानियों के माध्यम से प्रदर्षित किया जाएगा।
Udaipur
राज्य स्तरीय मुखौटा कला कार्यशालाः लुप्त होती परंपरा को नई जान
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