उदयपुर। लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री ने डूंगरपुर-बांसवाडा के सांसद राजकुमार रोत को आडे हाथो लेते हुए कहा कि संविधान व शासन सहीं तरीके से लागू है इसीलिए संसद में बैठे हैं, वरना वो भी अगर हथियार उठाने वालो में होते तो सरेंडर की लिस्ट में होते। उन्होंने कहा कि राजकुमार रोत जैसे नेता भी वोट के लालच में कांग्रेस और उसकी थ्योरी का समर्थन कर रहे है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने सोमवार को संसद में बोलते हुए बार-बार राजकुमार रोत को आडे हाथो लिया। उन्होंने कहा कि शासन और संविधान की वैधता को किसी भी अन्याय की एवज में चुनौती दी जा सकती है क्या। उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ लडने का हमारे संविधान ने रास्ता बनाया है, इसीलिए राजकुमार संसद में बैठे है, चुनाव लडें इसलिए यहां बैठे हैं, वरना वे भी सरेंडर की लिस्ट में होते, अगर हथियार उठाते तो।
अमित शाह ने कहा कि एक हथियारी मूवमेंट के जो वकील बन रहे हैं, कहते हैं कि हम अन्याय के खिलाफ लड रहे हैं, लेकिन संविधान को मानोगे या नहीं। किसी के साथ भी अन्याय होता है तो उसका समाधान हमारे संविधान में निहित है, अदालतें बनी हैं, विधानसभा, तहसील व पंचायतें बनी है, लेकिन ये लोग पूरी व्यवस्था को नकार कर हाथ में हथियार उठा लेंगे तो ऐसे कैसे चलेगा। जो जस्टिफाई करे उन्हें मैं कहना चाहता हूं वो समय चला गया, अब नरेंद्र मोदी की सरकार है। जो हथियार उठाएगा उसका हिसाब चुकाना पडेगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस बार बार कहती है कि आदिवासी का विकास नहीं हुआ और राजकुमार रोत जैसे नेता भी वोट के लालच में कांग्रेस और उसकी थ्योरी का समर्थन कर रहे हैं। मैं उनको पूछना चाहता हूं कि 60 सालों में से 50 साल तो शासन कांग्रेस ने किया तो फिर आदिवासी विकास से कैसे बच गया। विकास तो अब नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। 60 साल तक आदिवासी को कांग्रेस ने घर नहीं दिया, पानी नहीं दिया, स्कूल नहीं बनी, मोबाइल टॉवर नहीं दिए, बैंक की सुविधा नहीं पहुंचने दी और अब आप हिसाब मांग रहे हो। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता अब अपने गिरेबां में झांककर देखे कि दोषी कौन है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी राजकुमार रोत को केंद्रीय गृहमंत्री ने टोका था कि होगा तू राजकुमार कही का। सब जानते हैं कि बीएपी औपनिवेशिक सत्ता और वामपंथियों का एजेंडा लेकर चलती है। आदिवासी हिंदू नहीं, मानगढ़ धाम को लेकर अंग्रेजों की व्याख्या पर चलना अलग धर्म कोड जो कि चर्च का एजेंडा है। युवाओं को जिस प्रकार से स्कूल से निकलकर सड़कों पर धरना प्रदर्शन के लिए उकसाया जा रहा है जो चिंतनीय है संविधान, लोकतंत्र और संसद के प्रति समेत श्रद्धा रखना आवश्यक है क्योंकि वामपंथी के अनुसार सत्ता बंदूक की नाली से निकलती है। जिस प्रकार से कांग्रेस के साथ मिलकर वामपंथी एजेंडा चल रहे हो यह देश और समाज के लिए ठीक नहीं है। शाह ने कहा कि ऐसा क्या हो गया की 1947 से 1970 के बीच में आदिवासियों के आदर्श भगवान बिरसा मुंडा तिलका मांझी रानी दुर्गावती को छोड़कर माओ हो गया। कांग्रेस वामपंथियों का साथ लेटे-लेटे खुद ही वामपंथी बन गई है।
Udaipur
संविधान व शासन है इसलिए राजकुमार रोत संसद में बैठे हैं,
हथियार उठाते तो सरेंडर की लिस्ट में होते: अमित शाह
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