उदयपुर। आने वाले युग में त्याग की भावना रखना सर्वाेत्तम काज होगा और परोपकार की भावना रखने वाला ही वृतराज होगा - भगवान शंकर के इसी संदेश को प्रस्तुत करते नाटक वृतराज का मंचन पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की मासिक नाट्य योजना रंगशाला के अंतर्गत रविवार को शिल्पग्राम स्थित दर्पण सभागार में जयपुर की वीणापाणि कला मंदिर संस्था द्वारा किया गया। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में इस प्रभावशाली प्रस्तुति को खूब सराहा गया।
पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंद्र उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या रंगशाला के अंतर्गत वीणा पाणी कला मंदिर समिति जयपुर द्वारा वृतराज नाटक का मंचन रविवार को शिल्पग्राम उदयपुर स्थित दर्पण सभागार में किया गया। जयपुर तमाशा परिवार के कलाकार एवं साथी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इस नाटक का लेखन प्रसिद्ध रंगकर्मी कण तमाशा गुरु वासुदेव भट्ट ने किया और निर्देशन रंगकर्मी एवं थियेटर इन एजुकेशन एक्सपर्ट विशाल भट्ट ने किया।
इस नाटक में काले हिरण के शिकार की आधुनिक घटना को शिवपुराण में वर्णित भील कथा के साथ जोड़ते हुए दिखाया कि हिरण के शिकार के अपराधी को उसके मन की अच्छाई बुराई यह बताती है कि वो पिछले जन्म में शिकारी भील था और उसने एक हिरण के परिवार पर दया कर उसे छोड़ा था और निराहार शिव की अनजाने में आराधना की थी जिससे उसे शिव का वरदान प्राप्त हुआ था । उस अपराधी को यह जानकर अपने अपराध का बोध होता है और वह भविष्य में ऐसा ना करने का संकल्प करता है ।
नाटक व्रतराज शिव पुराण की कोटिरूद्र संहिता के चालीसवें अध्याय में वर्णित प्रसंग “अनजाने में शिवरात्रि व्रत करने पर भील राज पर हुई भगवान् शिव की अद्भुत कृपा” पर आधारित है जिसका तमाशा शैली में नाट्यरूपन्तरण किया गया है। जात पात न पूछे कोई, हरि को भजे सो हरि होई और कबीरा सोई पीर है, जो जाने पर पीर पर आधारित है - जिसमें जोधपुर के काले हिरण के शिकार आदि के वर्तमान संदर्भ भी जोड़े गए हैं ।
राजस्थान के लोक नाट्य जयपुर तमाशा के संगीत से सजी इस प्रस्तुति में झिलमिल भट्ट (भील शिकारी), अभिषेक झाँकल (आधुनिक शिकारी), डॉ सौरभ भट्ट( भगवान शंकर), सरगम भट्ट ( हिरणी/ अच्छाई), अभिनय भट्ट हिरण /अच्छाई), अखिल चौधरी (बुराई1)अनीस कुरैशी (बुराई2), पाखी भट्ट (हिरण का बच्चा), विशाल भट्ट (पुजारी) एवं नवीन टेलर ने भूमिकाए निभाई । नाटक में संगीत डॉ सौरभ भट्ट और शैलेन्द्र शर्मा का रहा, रूपसज्जा रवि बांका की, प्रकाश व्यवस्था शहजोर अली की और वेशभूषा नम्रता भट्ट की रही ।
रंगमंच प्रेमियों ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की इस पहल की प्रशंसा करते हुए ऐसे आयोजनों के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक (कार्यक्रम) पवन अमरावत, अधीक्षण अभियंता सी.एल. सालवी, दयाराम सुथार, सिद्धांत भटनागर सहित केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी एवं शहर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक (वित्तीय एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने किया।
नाटक का कथासार
तमाशा व्रतराज की कहानी शुरू होती है एक अदालत से, जहाँ एक प्रसिद्द
व्यक्ति अरमान पर काले हिरण के शिकार का मुकदमा चल रहा है और अदालत फैसला उसकी अंतरात्मा पर छोडती है। अरमान को उसकी आत्मा झकझोरती है और एक भील शिकारी की कहानी सुनाती है जो अपने तीन दिन से भूखे परिवार की भूख मिटाने के लिए शिकार की तलाश में निकलता है और एक शिव मंदिर पर लगे बील के पेड़ पर बैठ कर शिकार की प्रतीक्षा करता है। बारी बारी से उसके सम्मुख दो हिरणी और एक हिरण आता है, वो उनका शिकार करना चाहता है पर वो सब अपने परिवार को सूचित करके वापस लौट आने की कह के लौट चले जाते है। भील जब जब उन पर धुनष तानता है उसके तुम्बे से जल और बील के पेड से पत्ते नीचे शिव मंदिर पर गिरते है और अनायास ही उसकी निराहार शिव पूजा होती रहती है। जब हिरण हिरणी वापस आकर कहती है कि वो उसका भोजन बनने को तैयार है तो उनकी परोपकार की भावना देखकर उसका मन निर्मल हो जाता है और वो जानवरों को छोड़ देता है। उसके इस त्याग पर भगवान् शिव प्रसन्न होते है और उसे वरदान देते हैं। अरमान ये कहानी सुन के रोता है उसे ज्ञात होता है कि पिछले जनम में वो ही वह भील शिकारी था। उसे अपने वर्तमान कर्म काले हिरन के शिकार पर पश्चताप होता है और वो आइन्दा शिकार ना करने का प्रण लेता है।
भगवान् शिव कहते है कि जिस जिस के मन में निरीह प्राणियों के प्रति दया
का भाव होगा उसके मन में शिव का वास होगा और ऐसा हर व्यक्ति व्रतराज होगा।
Udaipur
परोपकार का भाव रखने वाला ही होगा वृतराज
Related stories
A Unique Initiative to Reconnect with Roots
Jaipur, To emotionally connect the new generation of wealthy business families born in the country's major me…
Artists from WZCC, Udaipur Perform at Rashtrapati Bhavan on Independence Day
Udaipur, On the occasion of India’s 80th Independence Day, the West Zone Cultural Centre (WZCC), Udaipur, pre…
Hindustan Zinc Celebrates Independence Day with Great Enthusiasm Across All Units and Head Office
Udaipur, Hindustan Zinc Limited, one of the world’s largest integrated zinc and top ten silver producers, cel…
Rajasthan Marks 80th Independence Day with Patriotic Fervour Across the State
Jaipur, Rajasthan celebrated the 80th Independence Day on Saturday with patriotic fervour, enthusiasm and a s…