विज्ञान समिति, इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया तथा डॉ. डी. एस. कोठारी संस्थान के संयुक्त तत्त्वावधान में आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम विज्ञान समिति में आयोजित किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति तथा राजस्थान राज्यपाल के उच्च शिक्षा परामर्शक प्रो. कैलाश सोडानी थे।
समारोह में विज्ञान समिति अध्यक्ष एवं न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. महीप भटनागर ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की पृष्ठभूमि तथा इसके महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही, विज्ञान समिति के विज्ञान लोकप्रियकरण प्रकल्पों की जानकारी देते हुए चल विज्ञान प्रयोगशाला एवं आर्यभट्ट विज्ञान चेतना केंद्र की उपयोगिता रेखांकित की।
कुलप्रमुख डॉ. के. एल. कोठारी ने डॉ. डी. एस. कोठारी उत्कृष्टता अवार्ड की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए विज्ञान समिति की 67 वर्षों की सेवायात्रा का संक्षिप्त परिचय प्रदान किया।
मीडिया प्रभारी प्रोफ़ेसर विमल शर्मा ने बताया कि इस वर्ष डॉ. डी. एस. कोठारी उत्कृष्टता सम्मान -2026 डॉ. कीर्ति जैन को प्रदान किया गया। उनका व्यक्तिगत परिचय, सेवाकार्य एवं उपलब्धियों का लेखा-जोखा डॉ. के. पी. तलेसरा ने प्रस्तुत किया। सम्मान प्राप्तकर्ता एवं मुख्य वक्ता डॉ. कीर्ति जैन, सीईओ, जीबीएच मेडिकल कॉलेज ने अपनी वार्ता में प्रौद्योगिकी के विकास तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से सटीक चिकित्सा पद्धति की विवेचना की। उन्होंने बताया कि औषधि का प्रकार और मात्रा अब रोगी की आवश्यकता के अनुसार होंगे। आधुनिक चिकित्सा में लक्षण, स्वास्थ्य पैरामीटर्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सही समय पर सही चिकित्सा, जीनोमिक्स, डीएनए सिक्वेंसिंग आदि विषयों की सरल चर्चा की तथा कैंसर चिकित्सा की आधुनिक प्रौद्योगिकी पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि प्रो. कैलाश सोडानी ने विज्ञान समिति के विभिन्न सेवा प्रकल्पों की प्रशंसा की तथा देश की प्रगति के लिए शिक्षा में अनुसंधान, नवाचार एवं पुस्तकालय की अनिवार्यता पर जोर दिया।
विज्ञान समिति अध्यक्ष डॉ. महीप भटनागर द्वारा रचित पुस्तक ‘सक्रिय मस्तिष्क-सक्रिय मन’ का विमोचन भी मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया।
इंजी. पुरुषोत्तम पालीवाल (इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स) एवं इंजी. आर. के. चतुर्वेदी (डॉ. डी. एस. कोठारी संस्थान) ने भी विचार व्यक्त किए। डॉ. के. एल. तोतावत ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आर. के. गर्ग ने किया।