कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग, महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड  टेक्नोलॉजी के सॉइल एंड वॉटर विभाग के सभागार में वाटर हीरो डॉक्टर पी सी जैन ने उपरोक्त संकल्प कराया।
प्रारंभ में डॉक्टर मंजीत सिंह ने डॉक्टर पीसी जैन का स्वागत एवं परिचय दिया।
डॉ पी सी जैन ने अपने प्रेजेंटेशन में प्रदेश में रैन वाटर हार्वेस्टिंग की विशेष आवश्यकता अधिक क्यों है इस पर कहा कि  देश में सर्वाधिक भूजल दोहन राजस्थान में हो रहा है। प्रदेश के शहरों में रूफटॉप रैन वाटर हार्वेस्टिंग न के बराबर हो रहा है । इसलिए आप सबको आगे आना होगा।
देवास वाटर फिल्टर की प्रणाली समझाते हुए बताया कि इससे एक हजार वर्ग फीट की छत से एक सेंटीमीटर वर्षा होने पर 1000 लीटर वर्षा जल भूजल में समाहित किया जा सकता है।केसिंग में पानी कैसे जाता है?,केसिंग कहां तक डालते हैं?,रिचार्ज से एक मीटर जल स्तर बढ़ने से 0.4 बिजली की बचत होती है ,यह सब बताया।
हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ मंजीत सिंह ने छत से पत्तों के गिरने को सिस्टम से बाहर करने की और वर्षा जल कम से कम व्यर्थ हो इसके उपाय बताए।डॉ मंजीत सिंह इस प्रणाली को अधिक से अधिक कैसे ऑटोमैटिक और सरल बनाए इस पर अपने स्टूडेंट् को एम टेक भी करवा रहें हैं।
डॉ पी सी जैन रैन वाटर हार्वेस्टिंग के संदर्भ में विद्यार्थियों से 10 प्रश्न पूछे और सही उत्तर देने वाले छात्र छात्राओं को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।बलराम शर्मा ,असिस्टेंट प्रोफेसर ने कार्यक्रम का संचालन किया। मंगेश भारती गोस्वामी,रक्षित जैन,विनय शर्मा,वर्षा रानी पोद्दार
को प्रतीक चिन्ह दिया गया।
फिल्टर दिया भेंट -
डॉ पी सी जैन ने विद्यार्थियों के सीखने हेतु एक फिल्टर भी भेंट किया। 
डॉ पी सी जैन ने सभी से संकल्प  कराया कि वे इस वर्षा काल पूर्व अपने अपने घरों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग करा कर दूसरों को भी प्रेरित करेंगे।
डॉ पी सी जैन