उदयपुर। भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण की ओर से अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में जनार्दन राय नागर विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. एस. एस. सारंगदेव ने कहा है कि सांस्कृतिक विनिमय में संग्रहालयों की बड़ी भूमिका है। वे विभाजित समाज को जोड़ते हैं, असमानताओं के उन्मूलन का प्रयास करते हैं और शिक्षण के अग्रदूत होते हैं। उनके लिए लगातार नवाचार की जरूरत है। भारतीय लोककला मंडल के निदेशक डॉ. लईक हुसैन ने कहा कि संग्रहालय सांस्कृतिक धरोहर होते हैं। वे प्रचलन से बाहर होती वस्तुओं के प्रति रुचि और व्यवहार को बनाए रखते हैं।
पुराविद् डॉ. जे. एस. खरकवाल ने मेवाड़ और जस्ता के लिए वाष्पीकरण तकनीक को पारदर्शियों से समझाया और कहा कि मेवाड़ खानों का संग्रहालय है, यह तकनीकों का कोश भी है। भारतविद्याविद डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू ने कहा कि संग्रहालय से ही हमें तथ्य और अटकल, सत्य और मिथ्या की पुष्टि होती है। संग्रहालय इस अटकल पर मुहर लगाता है कि महाराणा प्रताप के भाले और तलवारों का वजन सामान्य था! मेवाड़, उसके गांव, घर, अरावली की पहाड़ियों, गवरी जैसा नृत्त सब के सब सजीव संग्रहालय हैं।
अनुराग सक्सेना ने कहा कि संग्रहालयों के सामने आज नई चुनौतियां हैं। अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की जरूरत है। पर्यावरणविद महेश शर्मा ने कहा कि संग्रहालय केवल बीते हुए कल को नहीं बताते, वे भविष्य के प्रति सचेत भी करते हैं। आहड़ संग्रहालय मिट्टी से निकली वस्तुओं का संग्रह नहीं, यह मेवाड़ की स्मृति है, सभ्यता का दर्पण भी है।
डॉ. विवेक भटनागर ने कहा कि हर घर, हर व्यक्ति एक संग्रहालय की इकाई है। यदि ध्यान दिया जाए, तो इस ध्यान से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। डॉ. हंसमुख सेठ ने कहा कि संग्रहालय की अपनी जिम्मेदारी और दायित्व होते हैं। उन्होंने सिटी पैलेस म्यूजियम के अनेक पक्षों को पीपीटी से रेखांकित किया और कहा कि आज लोगों को संग्रह कला और संग्रह विज्ञान से जोड़ने की जरूरत है। डॉ. राजेन्द्रनाथ पुरोहित ने उदयपुर में संग्रह स्थलों की यात्रा को परिभाषित किया। भूगर्भ विज्ञानी नरेंद्र कुमार कावड़िया ने विभाग प्रमुख निलांजन खटूआ को जावर से प्राप्त यशद प्रदावण मूषा का नमूना भेंट किया। रंगकर्मी विलास जानवे और हितैष पानेरी ने भी विचार रखें। प्रारंभ में भारतीय लोककला मंडल के कलाकारों की ओर से प्रयोगधर्मी, मनोरंजक कठपुतलियों का सजीव कार्यक्रम रखा गया। संचालन सुश्री सुदीपा मंडल ने किया। सहयोगी मीनाक्षी, नरेश कुमार मीणा, डॉ. विशेष कुमार सिंह थे।
अकादमिक सत्र :
कार्यक्रम के अकादमिक सत्र में विभिन्न विशेषज्ञों ने संग्रहालयों के विविध आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. अभिमन्यु सिंह आरा ने संग्रहालय परिप्रेक्ष्य एवं संग्रहालय विज्ञान परिप्रेक्ष्य के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। साथ ही उन्होंने प्रसिद्ध लेखक ओरहान पामुक द्वारा लिखित द म्यूजियम ऑफ इनोसेंस के संदर्भ में चर्चा की तथा पुस्तक में उल्लिखित महत्वपूर्ण पंक्तियों को उद्धृत करते हुए संग्रहालयों की संवेदनात्मक, सांस्कृतिक एवं मानवीय भूमिका को रेखांकित किया।
इसके पश्चात महेश शर्मा ने आहड़ संस्कृति को संग्रहालय और आहड़ नदी से जोड़ते हुए एक संक्षिप्त व्याख्यान प्रस्तुत किया। भूपेंद्र श्रीमाली, हल्दीघाटी संग्रहालय, ने वर्तमान समय में विकसित हो रहे युद्ध परिदृश्य तथा स्थल-आधारित संग्रहालयों की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कोई भी आगंतुक किसी स्थल-आधारित संग्रहालय में जाने से पूर्व किन-किन पहलुओं के बारे में सोचता है तथा उसकी अपेक्षाएँ और अनुभव किस प्रकार निर्मित होते हैं।
भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के निदेशक प्रोफ़ेसर बी. वी. शर्मा ने विशेष संबोधन में उन्होंने सभी प्रतिभागियों, वक्ताओं एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र (डब्ल्यूआरसी) में निर्मित जनजातीय पारंपरिक खेल दीर्घा के बारे में जानकारी साझा की तथा भविष्य में ग्रामीण जीवनशैली दीर्घा के निर्माण की योजना से भी उपस्थित जनों को अवगत कराया।
सीसीआरटी के अविक सरकार ने संग्रहालयों की भूमिका एवं उनके महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उमेश प्रजापत, आहड़ संग्रहालय के क्यूरेटर ने आहड़ संग्रहालय के विषय में जानकारी देते हुए संग्रहालय में संरक्षित महत्वपूर्ण पुरावशेषों तथा उनकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। डॉ. रविंद्र देवरा, विद्वान, जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ ने “प्रागैतिहासिक काल मानव संबंधों और विविधताओं के बारे में क्या बताता है” विषय पर एक प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने प्रागैतिहासिक स्थलों और मानव विकास के अध्ययन के माध्यम से मानव संबंधों, सामाजिक संरचनाओं एवं विविधताओं के विभिन्न आयामों को समझाने का प्रयास किया। धन्यवाद कुमारी मीनाक्षी ने दिया। तकनीकी सहयोग नरेश कुमार मीना ने प्रदान किया। पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र के अन्य सदस्यों ने भी कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संग्रहालय दिवस के अवसर पर उपस्थित प्रतिभागियों एवं आगंतुकों ने संग्रहालय भ्रमण कर विभिन्न प्रदर्शित वस्तुओं, दीर्घाओं एवं सांस्कृतिक धरोहरों का अवलोकन किया।
Udaipur
संग्रहालय दिवस पर संगोष्ठी आयोजित
संग्रहालय मानव समुदाय को जोड़ते हैं
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