उदयपुर |  विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में डॉ. दौलतसिंह कोठारी शोध एवं शिक्षण संस्थान, विज्ञान समिति, महावीर इंटरनेशनल और जैन इंजीनियरिंग सोसायटी, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरूआत में अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन विज्ञान समिति के अध्यक्ष डॉ. महीप भटनागर ने किया।
मीडिया प्रभारी प्रोफ़ेसर विमल शर्मा ने बताया कि मुख्य वक्ता डॉ. एन. एल. कछारा ने ‘‘जैन धर्म में पर्यावरण रक्षा’’ विषय पर बताया कि जैन धर्म के सिद्धांत—अहिंसा, अनेकांत और अपरिग्रह—का पालन करने से पर्यावरण की रक्षा संभव है। 
सुभाष मेहता ने ‘‘सनातन धर्म में पर्यावरण संरक्षण’’ पर कहा कि सनातन संस्कृति में पशु, नदियाँ, वृक्ष और पंचमहाभूत सभी पूजनीय माने गए हैं; इन मान्यताओं को जीवन में उतारने से पर्यावरण स्वाभाविक रूप से सुरक्षित रहेगा। 
प्रभास फैलबूस ने ‘‘ईसाई धर्म में पर्यावरण एवं अहिंसा’’ पर अपने विचार साझा किए और कहा कि प्रेम ही सच्चा धर्म है तथा सृष्टि के प्रति प्रेमभाव से ही इसका संरक्षण संभव है।
लक्ष्मण पुरी गोस्वामी ने चेतावनी दी कि लालच में जानवरों को ऑक्सीटोसीन इंजेक्शन देकर दूध की मात्रा अनैच्छिक और व्यापारिक रूप से बढ़ाई जा रही है, जो पर्यावरण और धर्म दोनों के दृष्टिकोण से अनुचित है। 
विषय परिचय प्रस्तुत करते हुए डॉ. सुरेन्द्र पोखरणा ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा हेतु धर्म और विज्ञान का समन्वय आवश्यक है।
 डॉ. के. एल. कोठारी ने अपने आशीर्वाद में विज्ञान समिति के परियोजनाओं—विज्ञान के लोकप्रियरण, महिला सशक्तिकरण व चिकित्सा सेवा—के बारे में जानकारी दी।
मुख्य अतिथि प्रो. कैलाश डागा, कुलगुरु, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पांच सूत्र दिए: वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा, प्लास्टिक से दूरी और संसाधनों व ऊर्जा का मितव्ययी उपयोग। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षिक उन्नति के प्रति अपने संकल्प का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम में आभार-व्यक्ति महासचिव, कोठारी संस्थान के इंजी. एम. पी. जैन ने की और आयोजन का संचालन डॉ. के. पी. तलेसरा ने किया। 
कार्यक्रम में चारों संस्थाओं के एक-सौ से अधिक सदस्य उपस्थित रहे। प्रमुख उपस्थित जनों में डॉ. सुजान सिंह, रवीन्द्र सुराणा, इंजी. अरुण कोठारी, इंजी. प्रकाश जैन, इंजी. बी. एल. खमेसरा, डॉ. बी. एल. चावत, मुनीश गोयल, डॉ. आर. के. गर्ग, इंजी. आर. के. खोखावत, शांतिलाल भंडारी, डॉ. पुष्पा कोठारी, रेणु भंडारी, गीता सिंह, मधु मित्तल आदि शामिल थे।