उदयपुर |  वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486 वीं जयंती के उपलक्ष्य में मेवाड़ क्षैत्रीय महासभा के सात दिवसीय कार्यक्रम के क्रम में, मोतीमगरी स्मारक पर पहल संस्थान उदयपुर एवं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा जिला उदयपुर महिला शाखा की ओर से अमर बलिदानी झाला मान  सिंह मूर्ति स्थल व पार्क पर माल्यार्पण एवं  साहित्यिक संगोष्ठी आयोजन हुआ जिसमें वीर रस, पर्यावरण संरक्षण पर सार गर्भित परिचर्चा व कविताएं सुनाई  गई । 
कार्यक्रम मैं मुख्य अतिथि पूर्व विधायक प्रीति गजेंद्र सिंह शक्तावत, विशिष्ट अतिथि कृषि वैज्ञानिक डॉ मोहन सिंह शक्तावत रहे । डॉक्टर शक्तावत ने झाला मानसिंह के जीवन वृत पर प्रकाश डाला। संयोजिका ज्योत्स्ना झाला मैं  मानसिंह झाला के अदम्य साहस और शौर्य का वर्णन करते हुए बताया कि हल्दीघाटी युद्ध में जब महाराणा प्रताप चारों ओर से दुश्मनों से घर गए थे तब झाला मानसिंह ने स्वामी भक्ति का परिचय देते हुए दुश्मनों को चकमा देने हेतु सारे राज चिन्ह अपने ऊपर ले लिए  और महाराणा प्रताप को सफलतापूर्वक दुश्मनों के चक्रव्यूह से बाहर निकाल दिया। इस दौरान दुश्मनों से लड़ते हुए स्वयं वीरगति को प्राप्त हुए।
प्रोफेसर विमल शर्मा द्वारा सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुए माल्यार्पण एवं संगोष्ठी में विचार व्यक्त करनेवालों में प्रमुख प्रताप सिंह तलावदा, अंजुमन तामुल इस्लाम के सदर मुख्तियार कुरैशी, पूर्व पार्षद दुर्गेश एवं हिदायत तुल्ला , मुस्लिम महासंघ के प्यारे भाई, सात दिवसीय कार्यक्रम के संयोजक कमलेंद्र सिंह पंवार , प्रताप जयंती कार्यक्रम का संयोजक प्रेम सिंह शक्तावत, मोती मंगरी स्मारक सचिव सतीश शर्मा, अजय सिंह पहल, सत्यपाल डोडिया, कैलाश दान भीमावत, लक्ष्मण पुरी गोस्वामी, मुश्ताक चंचल तथा अन्य शामिल रहे।