उदयपुर। संगीत साधना, आत्मीयता और मधुर स्वरों से सजी संस्था 'स्वर सुधा' की त्रैमासिक बैठक सुरों के अनुपम उत्सव में बदल गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ, जिसके बाद संस्था के वरिष्ठ सदस्य के.के. त्रिपाठी ने सभी संगीत प्रेमियों का स्वागत किया।

अल्पाहार के उपरांत शुरू हुए सांगीतिक सत्र में एक के बाद एक कुल 18 शानदार प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि उपस्थित श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। मंच संचालन ऊषा कुमावत ने किया। उन्होंने संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए वर्णमाला क्रम के अनुसार प्रतिभागियों को आमंत्रित किया।

अशोक कुमार जोशी, भुवनेश्वर पांडे, देवव्रत पंड्या, गीता सिंह, हरीश बहादुर, के.के. त्रिपाठी, कुसुमलता त्रिपाठी, एम.पी. माथुर, मंजू गर्ग, रजनी जोशी, सुधीर माथुर, सुरेखा बाबेल, सुषमा अग्रवाल, विमल शर्मा, रवि पाठक, रेणु माथुर और ऊषा कुमावत ने सदाबहार फिल्मी गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। वहीं भंवरलाल कुमावत ने अपनी मार्मिक कविता "ऐ सुख कहाँ" का प्रभावशाली पाठ कर साहित्यिक रंग भी बिखेरा।

विशेष आकर्षण रहे देवव्रत पंड्या, जिन्होंने माउथ ऑर्गन पर "एक दिन बिक जाएगा" की मधुर धुन प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी।

सांगीतिक कार्यक्रम के बाद आयोजित स्नेह भोज ने सभी सदस्यों को आत्मीयता के सूत्र में बांधा। इसके पश्चात महिला एवं पुरुष टीमों के बीच हुई अंताक्षरी प्रतियोगिता भी बेहद रोमांचक रही। निर्धारित 45 मिनट तक चले इस मैत्रीपूर्ण मुकाबले का परिणाम बराबरी पर रहा, जिससे दोनों टीमों का उत्साह देखते ही बना।

मीडिया समन्वयक प्रो. विमल शर्मा ने बताया कि पिछले आठ वर्षों से संचालित संस्था 'स्वर सुधा' का उद्देश्य वरिष्ठ संगीत प्रेमियों को नियमित रियाज के माध्यम से सुरों में निखार लाने तथा संगीत के प्रति उनकी साधना को निरंतर बनाए रखना है। संस्था में वर्तमान में 45 वरिष्ठ संगीत प्रेमी दंपती सक्रिय सदस्य हैं। प्रत्येक सप्ताह ऑनलाइन संगीत कार्यशाला तथा प्रत्येक तीन माह में स्नेह मिलन आयोजित किया जाता है। बैठक में सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सुझाव दिया कि बढ़ती सहभागिता को देखते हुए अब इस स्नेह मिलन का आयोजन त्रैमासिक के स्थान पर द्विमासिक किया जाए।

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