उदयपुर। विद्या भवन गांधी शिक्षा अध्ययन संस्थान, रामगिरि, बड़गाँव, उदयपुर में पद्म भूषण स्व. जगत सिंह मेहता की जयंती के उपलक्ष्य में "विकास एवं विरासत के बीच पर्यावरण संरक्षण" विषय पर विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के वक्ता डॉ. पी.सी. जैन (एमबीबीएस, वाटरमैन) ने जल संरक्षण को वर्तमान समय की

सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि उन्होंने पिछले 26 वर्षों से जल संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए वर्षा जल संचयन, परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण तथा स्थानीय सहभागिता को जल संकट के समाधान का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने स्तर पर जल संरक्षण के छोटे-छोटे प्रयास करे तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।“कुए ,बावड़ीयों की विरासत बचायें ,भूजल का भविष्य बनाएं” का नारा देकर 6 छात्रों को “जल मॉनिटर” बनाया|

श्री नन्द किशोर शर्मा, पूर्व सचिव, सेवा मंदिर एवं मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट ने पद्म भूषण जगत सिंह मेहता के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विकास तभी सार्थक है जब उसमें प्रकृति और समाज के प्रति संवेदनशीलता बनी रहे।

श्री शैलेन्द्र तिवारी, अध्यक्ष, मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट ने विकास और पर्यावरण के मध्य संतुलन बनाए रखने पर बल देते हुए कहा कि अंधाधुंध विकास की बजाय सतत एवं समावेशी विकास की अवधारणा को अपनाना समय की आवश्यकता है।

श्री ज्ञान प्रकाश सोनी, जल, पर्यावरण एवं भूमि प्रबंधन सलाहकार तथा विकास विशेषज्ञ (आईआईटी रुड़की) ने जल, भूमि एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े अपने दीर्घ अनुभव साझा करते हुए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाओं में पर्यावरणीय संतुलन और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण समान रूप से आवश्यक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की प्राचार्य डॉ. भगवती अहीर ने की। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करते हैं।

कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डॉ. तारा कुमावत तथा सह-संयोजन डॉ. सरिता जैन ने किया। अंत में आभार व्यक्त करते हुए डॉ प्रियंका जैन ने कहा  कि विकास तभी सार्थक होगा जब वह प्रकृति, जल, पर्यावरण तथा हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ आगे बढ़े।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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