उदयपुर, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं प्रवक्ता पंकज कुमार शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा "राइजिंग राजस्थान" के तहत किए गए एमओयू (MoU) को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन अब इन दावों की वास्तविकता सामने आने लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि निवेशकों को भूमि आवंटन, विभागीय स्वीकृतियों तथा अन्य आवश्यक अनुमतियों के लिए महीनों तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसके कारण अनेक निवेश परियोजनाएँ आज भी धरातल पर शुरू नहीं हो सकी हैं।

शर्मा ने कहा कि यदि सरकार निवेशकों को समयबद्ध रूप से भूमि, आवश्यक स्वीकृतियाँ एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने में विफल रहती है, तो इसका सीधा दुष्प्रभाव प्रदेश के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश के वातावरण पर पड़ेगा। केवल एमओयू पर हस्ताक्षर कर उसका प्रचार-प्रसार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का अभाव, लालफीताशाही तथा प्रशासनिक उदासीनता के कारण निवेशकों का विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में निवेशक राजस्थान के बजाय अन्य राज्यों में निवेश करना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक समझेंगे। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ युवाओं के रोजगार के अवसर भी प्रभावित होंगे।

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