उदयपुर,  रीनासां यूनिवर्सल क्लब, उदयपुर तथा सोसाइटी फॉर माइक्रोवाइटा रिसर्च एंड इंटीग्रेटेड मेडिसिन (स्मरिम) के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार, 5 सितंबर को टेकरी-मादरी रोड स्थित जागृति परिसर में कौशिकी नृत्य पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में आसपास के क्षेत्रों से आई करीब 20 महिलाओं ने भाग लेकर कौशिकी नृत्य की बारीकियां सीखीं।

स्मरिम के अध्यक्ष डॉ. एस. के. वर्मा ने बताया कि आनंद मार्ग प्रचारक संघ के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने मार्गी साधिकाओं के अनुरोध पर 6 सितंबर, 1978 को कौशिकी नृत्य का आविष्कार किया था। इसी अवसर को मार्गी बंधुओं द्वारा कौशिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

डॉ. वर्मा ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से कौशिकी नृत्य के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कौशिकी को मानस-आध्यात्मिक व्यायाम के रूप में माना जाता है और इसे विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। उनके अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से गठिया, यकृत संबंधी समस्याओं, हिस्टीरिया, निराशा, अवसाद तथा मासिक धर्म संबंधी समस्याओं सहित विभिन्न शारीरिक और मानसिक परेशानियों में लाभ मिल सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि नियमित अभ्यास शरीर की अंतःस्रावी ग्रंथियों के संतुलन में सहायक हो सकता है। कौशिकी नृत्य भाव और मुद्राओं पर आधारित है तथा महिलाएं और पुरुष दोनों इसका अभ्यास कर सकते हैं। कार्यशाला में इसके आध्यात्मिक पक्ष पर भी चर्चा की गई और इसे अणु मन को भूमा मन से जोड़ने में उपयोगी बताया गया।

कार्यशाला के दौरान कौशिकी प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ, जिसमें सरिता देव, अंजू राठौर, उषा, हेमलता और सुधा वर्मा सहित प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन स्मरिम की सचिव डॉ. वर्तिका जैन ने किया। समापन पर सामूहिक जलपान का आयोजन किया गया।