उदयपुर । “शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को संवारकर राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने वाला मार्गदर्शक होता है।” इसी भावना के साथ जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ द्वारा संचालित राजस्थान विद्यापीठ महाविद्यालय, बेमला-कुराबड़ में शिक्षक दिवस श्रद्धा, सम्मान एवं उत्साह के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. कुणाल आमेटा ने बताया कि समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मांगीलाल जनवा ने की। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रशासक डॉ. वर्तिका गुर्जर थीं, जबकि डॉ. निर्मला सालवी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने कविता, प्रेरक भाषण एवं मधुर गीतों की प्रस्तुति देकर अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आभार व्यक्त किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने समारोह को भावनात्मक और प्रेरणादायी बना दिया।
इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्राचार्य डॉ. एम.एल. जनवा ने कहा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाने के साथ ही उन्हें संस्कार, अनुशासन और जीवन की सही दिशा प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और एक अच्छे शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होती, बल्कि विद्यार्थियों को स्वस्थ एवं सकारात्मक वातावरण प्रदान कर उनकी कल्पनाशीलता, रचनात्मकता और प्रतिभा को निखारना भी उसका महत्वपूर्ण दायित्व है।
मुख्य अतिथि डॉ. वर्तिका गुर्जर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जीवन में अनुशासन, शिक्षा और सही मार्गदर्शन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक बनाने का सशक्त माध्यम है तथा सफलता के लिए अनुशासन और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
कार्यक्रम में लीला मीणा, मीना कुंवर, प्रिया मीणा, सोनल कुंवर एवं शंकरी पटेल ने भी शिक्षक दिवस के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए और गुरुजनों के प्रति सम्मान प्रकट किया।
कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन मनीषा कुंवर राठौड़ ने किया, जबकि अंत में तुलसी सुथार ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
समारोह ने विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को एक बार फिर सशक्त रूप से जीवंत कर दिया।