उदयपुर, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), उदयपुर में प्रशासनिक अनियमितताओं, नियुक्तियों, पदोन्नतियों एवं कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों को लेकर प्राप्त विभिन्न प्रतिनिधित्वों और उपलब्ध कराई गई सूचनाओं के आधार पर चांसलर भंवरलाल गुर्जर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉ. मंजू मंडोत को विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया है।

डॉ. मंजू मंडोत ने 14 अगस्त को कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया। उनके पदभार संभालने के साथ ही विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज को लेकर नई दिशा और पारदर्शिता की उम्मीदें बढ़ी हैं।

प्राप्त प्रतिनिधित्वों में पूर्व प्रशासन के कार्यकाल को लेकर नियुक्तियों, तदर्थ कर्मचारियों के नियमितीकरण, पदोन्नतियों तथा कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न सेवा लाभों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि जहां कई कर्मचारी वर्षों से संविदा अथवा तदर्थ आधार पर सेवाएं दे रहे हैं, वहीं कुछ मामलों में अपेक्षाकृत कम अवधि में ही नियमितीकरण का लाभ दिए जाने के निर्णय लिए गए।

छह माह में नियमितीकरण का मामला

प्रतिनिधित्वों में विशेष रूप से एक शोध सहायक की नियुक्ति एवं नियमितीकरण का मामला उठाया गया था। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी की 26 फरवरी 2026 को तदर्थ आधार पर नियुक्ति की गई थी और लगभग छह माह बाद 21 जुलाई 2026 को नियमित नियुक्ति का आदेश जारी किया गया।

शिकायतकर्ताओं ने इस मामले में चयन प्रक्रिया, पात्रता, सक्षम स्तर की स्वीकृति तथा विश्वविद्यालय के लागू नियमों के अनुपालन की जांच की मांग की थी।

इसके अलावा प्रतिनिधित्वों में नियुक्तियों एवं पदोन्नतियों में कथित पक्षपात, लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण, वेतनवृद्धि, पदोन्नति, पीएफ विवरण, वेतन पर्ची, ग्रेच्युटी तथा सेवा पुस्तिका जैसे मामलों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

इनमें से व्यक्तिगत नियुक्तियों, रिश्तेदारी अथवा कथित भाई-भतीजावाद से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इन मामलों की वास्तविक स्थिति विश्वविद्यालय के आधिकारिक अभिलेखों एवं संबंधित प्रक्रियाओं की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

नई कुलपति से पारदर्शी व्यवस्था की उम्मीद

चांसलर भंवरलाल गुर्जर द्वारा डॉ. मंजू मंडोत की नियुक्ति को इन शिकायतों और प्रतिनिधित्वों के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन में बदलाव की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

डॉ. मंडोत के कार्यभार संभालने के बाद अब कर्मचारियों की लंबित शिकायतों, नियमितीकरण से जुड़े मामलों तथा पूर्व प्रशासन के दौरान लिए गए विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों पर विश्वविद्यालय की नई व्यवस्था के रुख पर नजर रहेगी।

कर्मचारियों और शिकायतकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि नई कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में नियम आधारित प्रशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों को प्राथमिकता मिलेगी।

डॉ. मंजू मंडोत के कार्यभार ग्रहण करने के साथ जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ में प्रशासनिक बदलाव का नया अध्याय शुरू हुआ है।