उदयपुर। समाज और राष्ट्र के प्रति सेवा, समर्पण तथा दायित्वबोध की प्रेरणा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हस्तीमल व्याख्यानमाला का प्रथम व्याख्यान 13 सितंबर, रविवार को रवीन्द्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, उदयपुर के मुख्य सभागार में पाथेय कण संस्थान, विश्व संवाद केन्द्र समिति एवं रवीन्द्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का विषय ‘हम भारत के लोग : संविधान का समाज को एकात्म संदेश’ रखा गया है।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना के प्रारंभिक शब्द ‘हम भारत के लोग’ को केन्द्र में रखते हुए संविधान में निहित सामूहिक चेतना, नागरिक दायित्व और एकात्म भाव को समाज के जीवन से जोड़ने पर विचार किया जाएगा।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान के अध्यक्ष श्री हनुमान सिंह राठौड़ मुख्य वक्ता होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पाथेय कण संस्थान के अध्यक्ष एवं हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय करेंगे।

हस्तीमल हिरण के जीवन से प्रेरित आयोजन विश्व संवाद केन्द्र के सचिव प्रवीण कोटिया ने बताया कि कीर्तिशेष हस्तीमल हिरण का जीवन समाज और राष्ट्र के प्रति सेवा एवं समर्पण का प्रेरक उदाहरण रहा।

आमेट, राजसमंद में जन्मे हस्तीमल हिरण विद्यार्थी जीवन से ही संघ कार्य से जुड़े और विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए वर्ष 2004 से 2015 तक संघ के अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख रहे।

पाथेय कण के कार्य को आगे बढ़ाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वर्ष 2023 में उनके निधन के बाद उनके नेत्र तथा देह चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के लिए आरएनटी आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के शरीर रचना विभाग को समर्पित किए गए। इसी सेवा और समर्पण की भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से व्याख्यानमाला आयोजित की जा रही है।

देहदान करने वाले परिवारों का सम्मान कार्यक्रम में वर्ष 2025 एवं 2026 में देहदान कर चुके दिवंगत व्यक्तियों के परिवारजनों का सम्मान किया जाएगा। इसके माध्यम से देहदान करने वाले परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ अंगदान एवं देहदान के प्रति जागरूकता का संदेश दिया जाएगा।

संविधान प्रदर्शनी रहेगी मुख्य आकर्षण कार्यक्रम संयोजक विकास छाजेड़ ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर संविधान की मूल प्रति में शामिल 22 चित्रों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी रहेगी जिसमें संविधान में शामिल किए गए 22 चित्रों की बारीकियां, संविधान के उस भाग में शामिल किए जाने के महत्व के साथ दिखाया जाएगा।

संविधान की मूल प्रति में लगभग हर अध्याय के आरंभ में कोई न कोई चित्र छापा गया हैं। इन चित्रों में मोहनजोदड़ो और सिंधु घाटी सभ्यता की मोहरें, श्रीराम, श्रीकृष्ण, हिमालय, थार का रेगिस्तान, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, विक्रमादित्य, नालंदा विश्वविद्यालय, राजा भरत, हनुमान, नटराज, भागीरथ की गंगा तपस्या, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोबिंद सिंह, वैदिक गुरुकुल, महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस आदि जैसे राष्ट्रीय गौरवों को संविधान निर्माताओं ने जिस विचार से संविधान में शामिल किया, उसका विवरण मिलेगा।

इसी के साथ पुस्तक मंडपम में 100 से अधिक लेखकों की पुस्तकों का साहित्य एवं पठन केन्द्र भी रहेगा।

आयोजन की व्यवस्थाओं को 35 विभागों में विभाजित किया गया है। विद्यार्थियों और युवाओं की सहभागिता के लिए शहर के प्रमुख विद्यालयों, महाविद्यालयों और प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण संस्थानों में आमंत्रण पत्र वितरित किए गए हैं। तैयारियों का निरीक्षण करने के लिए पाथेय कण संस्थान, जयपुर के सह-प्रबंध संपादक श्याम सिंह ने आयोजन स्थल का निरक्षण किया।