GMCH STORIES

साहित्यकार परिचय:जीवनमूल्यों की पुनर्स्थापना करती अक्षयलता शर्मा की रचनाएं

( Read 593 Times)

12 Jan 26
Share |
Print This Page
साहित्यकार परिचय:जीवनमूल्यों की पुनर्स्थापना करती अक्षयलता शर्मा की रचनाएं

साहित्य की विभिन्न शैलियों में भावपूर्ण लेखन की शिल्पी श्रीमती अक्षयलता शर्मा का जन्म एक जनवरी 1959 को कोटा में माता स्व. रामसुखी बाई और पिता स्व. मदनमोहन शर्मा के परिवार में हुआ। इन्होंने संस्कृत और हिंदी विषयों में एमए, बीएड एवं आयुर्वेद रत्न की शिक्षा प्राप्त की। कई पत्र-पत्रिका में इनकी रचनाओं का नियमित प्रकाशन होता है। 

    वर्तमान सामाजिक परिवेश में गिरते हुए जीवन मूल्यों के मर्म को लेकर जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना, संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य के साथ पद्य विधा में कविताओं के साथ-साथ गीत, प्रहेलिका, चतुष्पदी और गद्य विधा में लेख, कहानी, कहानी का नाट्य रूपांतरण, समीक्षा का लेखन कर सभी को जीवन मूल्यों को बचाने के लिए के सतत सजग एवं प्रयत्नशील रहने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

आपका हिंदी, राजस्थानी, हाड़ौती और संस्कृत भाषा पर  समान अधिकार है। व्यंग्य शैली, प्रश्न शैली, हास्य-व्यंग्य शैली, गीत शैली, समास शैली, चित्र शैली को अपनाते हुए भक्ति रस, शांत रस, वीर रस, हास्य रस, श्रृंगार रस, अद्भुत रस और करुण रस भावों से आप्लावित साहित्य का सृजन करती हैं। आपकी पुस्तकों की समीक्षा की अपनी अलग शैली है जिसमें साहित्य का पुट समीक्षा को औरों से अलग ला खड़ा करता है ।

       इनके काव्य सुजन में मानवीकरण, प्रतीकात्मकता, विविध शैलियों का प्रयोग, शब्द शक्तियों के सफल प्रयोग, विषय की गंभीरता, चिन्तन, विश्लेषण, दिशाबोध, प्रभावोत्पादकता, हास्य विनोद, भावोत्तेजक, विशद शब्दकोश अवसरानुकूल क्लिष्ट शब्दावली व सामासिक शब्दों का प्रयोग, अलंकृत एवं प्रवाहपूर्ण भाषा, मौलिक अभिव्यंजना, माधुर्य, ओज व प्रसाद गुण सम्पन्नता की विशेषताएँ हैं।

    इनकी कहानियों में गिरते पारिवारिक मूल्य, विफल चरित्र का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, आवास की समस्या प्रमुख विषय हैं। परिजनों के प्रति तथा मनुष्य को मनुष्य के प्रति वेतना की साहित्यिक उड़ान सौहार्दपूर्ण व्यवहार करने, आवास की समस्या हल करने के लिए संवेदना जगाते हुए पीड़ितों की यथाशक्ति सहायता करने जैसे कथ्य इनकी कहानियों में मुखर हैं और संदेश है कि पाठक मर्मस्पर्शी घटनाओं से प्रभावित होकर समस्याग्रस्त परिवार व समाज के हित में प्रयास करने को प्रेरित होंगे।

     वे बताती हैं बचपन में कक्षा पांच से ही इनके मन में कविता लिखने के शौक ने जन्म लिया। क्या लिखें विषय कोई सूझ नहीं रहा था। इन्होंने  उस समय 'करो परीक्षा की तैयारी' प्रथम तुक बंदी कविता लिखी। परिजनों, सहपाठियों और शिक्षकों ने खूब सराहा। उत्साहित होने से उस समय 'सुमन', 'यह स्वर्णमहल' और 'चल रही वह लकुटी टेक' जैसी तुक बंदियों की झड़ी लग गई। फिर व्यस्तता के चलते यथा अवसर उद्वेलित करने वाली संवेदनाएँ इन्हें झकझोरती हुई इनकी लेखनी को क्रियाशील करती रहीं। समय के साथ-साथ आज साहित्य में इन्होंने जिस प्रकार मुकाम बनाया है उस पर प्रसिद्ध संपादक अशोक बत्रा ने लिखा "'जिन कवियों ने छंदों का निपुणता पूर्वक निर्वाह किया है और अपने भाव को विशेष अभिव्यक्ति प्रवाह में निबद्ध किया है, उनमें से कई साहित्यकारों की तरह अक्षयलता शर्मा प्रभावित करती हैं।"

       जीवनमूल्य, जीवनमूल्य द्वितीय सुमन और मानस की गूंज आपकी काव्य संग्रह कृतियां हैं। बाल काव्य निकुंज श्रृंखला में पल्लव और प्रसून बाल कृतियां हैं। कृतघ्न और अंधेरे में  कहानियां और समझ लघु कथा लोकप्रिय हुई हैं। आपको लेखन के लिए कोटा भारतेंदु समिति द्वारा साहित्य श्री अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया गया है। आप वर्तमान में पिछले कई वर्षों से जयपुर में निवास कर रही हैं। ( संपर्क : अपना बेंगलो, बालाजी विहार,,मोहनपुरा बालाजी, बी-34, सांगानेर, जयपुर-302029 (राजस्थान) मोबाइल : 9461704390 )

--------------


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like