झालावाड़ हिन्द की सांस्कृतिक विरासत समूह द्वारा अजमेर की लोढ़ा धर्मशाला में रविवार को एक दिवसीय क्षेत्रीय पुरातत्त्व धरोहर पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अनेक इतिहासकारों, पुरातत्त्वविदों और शौधार्थियों ने अपने विचार और शोध पत्र प्रस्तुत किये।
सेमिनार के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश भोपाल के पुरातत्त्वविद् डॉ. नारायण व्यास ने कहा कि क्षेत्रीय इतिहास और धरोहर की जानकारी से ही देश और प्रदेश के इतिहास का निर्माण होता है। उन्होंने बताया कि अजमेर संभाग में पुष्कर ऐसा प्राचीन स्थान है जहाँ ईसा पूर्व दूसरी और पहली शताब्दी में रहने वाले बौद्ध भिक्षु और भिक्षुणियों ने मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध सांची के बौद्ध स्तूपों के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। अध्यक्षता कर रही राजस्थान पुरातत्त्व विभाग जयपुर की तकनीकी अधीक्षक धर्मजीत कौर ने कहा कि अजमेर क्षेत्र में अनेक इतिहास महत्व की धरोहरें है जिनका इतिहास यहाँ की नई पीढ़ी को दिखाना चाहिये ताकि वे अपनी क्षेत्रीय इतिहास पर गर्व कर सकें। उन्होंने कहा कि पुरातत्त्व विभाग भी इस बारे में अनेक जानकारियाँ प्रकाशित करता है जिसका उपयोग विद्यालय के विद्यार्थी कर सकते है।विशिष्ट अतिथी डॉ शोभा सुमन मिश्रा अध्यक्ष सेंट्रल एकेडेमी एजुकेशन सोसाइटी अजमेर ने पुरातत्व एवं इतिहास को जानने एवं शोध कार्य के लिये इस सेमिनार को महत्त्वपूर्ण आयोजन बताया।
विशिष्ट अतिथि अश्विनी मुद्रा शोध संस्थान उज्जैन के निदेशक डॉ. आर.सी. ठाकुर ने कहा कि देश के प्रत्येक ग्रामों और स्थलों में अनेक प्राचीन सिक्के आज भी प्राप्त होते है और इन्हीं से क्षेत्रीय इतिहास की प्राचीनता और वहाँ के इतिहास की प्रमाणित जानकारी मिलती है। विशिष्ट अतिथि मध्यप्रदेश वाकणकर पुरातत्त्व शोध संस्थान भोपाल के शोध अधिकारी डॉ. ध्रुवेन्द्र सिंह जोधा ने कहा कि अब भारत के प्रत्येक जिलों और कस्बों का स्थानीय इतिहास लेखन होना चाहिये ताकि आने वाली पीढ़ी अपने क्षेत्रीय इतिहास की घटनाओं को जान सके।
सेमिनार में झालावाड़ के इतिहासकार ललित शर्मा ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया। संचालन अजमेर की लोकसंस्कृतिविद् डॉ. वर्षा नालमे ने और आभार अजमेर की इतिहासविद् डॉ. उर्मिला शर्मा ने ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्राचीन मुद्राओं और दुर्लभ डाक टिकटों की प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसे अनेक स्थानीय जनों ने देखा। सेमिनार में बीकानेर की डॉ. उमा दुबे, भोपाल के डॉ. ध्रुवेन्द्र सिंह जोधा, बांसवाड़ा के डॉ. घनश्याम सिंह भाटी, कोटा के राकेश सोनी, रतलाम के डॉ. नरेन्द्र सिंह पंवार, उज्जैन की डॉ. मंजू यादव, बारां के राकेश शर्मा, कोटा के डॉ. नरेन्द्र कुमार मीणा, डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, बारां के हंसराज नागर, डॉ. हेमलता वैष्णव, झालावाड़ के संजू कुमार शर्मा, डॉ. प्रीति शर्मा, उज्जैन की डॉ. विनिता राजपुरोहित, डॉ. श्वेता पाठक, बांसवाड़ा की डॉ. अदिती गौड़, केकड़ी की पुष्पा शर्मा, अजमेर की डॉ. उर्मिला शर्मा व डॉ. वर्षा नालमे ने भी क्षेत्रीय इतिहास और पुरातत्त्व धरोहर तथा लोक संस्कृति पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये तथा झालावाड़ के समाज सेवी ओम पाठक भी उक्त कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर अतिथियों का सम्मान जयप्रकाश शर्मा व धर्मेन्द्र कुमार शर्मा ने किया। अन्त में अतिथियों ने सभी शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले विद्वानों और शौधार्थियों को प्रमाण पत्र व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया।