उदयपुर, भारतीय शिक्षा पद्धति में लिटरेसी (साक्षरता) तथा एजुकेशन (ज्ञान) दोनों ही अलग-अलग विषय रहे हैं। यूरोप में लिटरेसी, तथा जानकारी को ही एजुकेशन माना जाता रहा है जबकि भारत में अक्षर ज्ञान और ज्ञान दोनों में फर्क रहा है। यह वक्तव्य प्रताप गौरव केंद्र शोध विभाग के  निदेशक डॉ विवेक भटनागर ने विद्या भवन पॉलिटेक्निक राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा साक्षरता दिवस पर  आयोजित व्याख्यान में व्यक्त किए।
डॉ भटनागर ने कहा कि जानकारी तथा सूचनाओं का तार्किक विश्लेषण ज्ञान है। यही भारत की ज्ञान परंपरा है। ऐसे में लिटरेसी डे, साक्षरता दिवस  पश्चिमी शिक्षा  पद्धति के  परिप्रेक्ष्य  में तो ठीक है, लेकिन  भारत के ज्ञान के लक्ष्य से सर्वथा भिन्न है। ज्ञान को भारत में श्रुति भी कहा गया है। आज समाज को केवल साक्षर नहीं वरन  ज्ञानवान और कौशल युक्त बनाना जरूरी है।
भटनागर ने कहा कि राजा भोज लिखित सरस्वती कंठ भरण में लिखा गया है कि सरस्वती कंठ का अभ्यारण है। जब सरस्वती कंठ में है तो व्यक्ति का मस्तिष्क ज्ञान प्रवाहित करेगा लेकिन अगर सरस्वती कंठ में नहीं है तो उसकी उपयोगिता भी नहीं।
अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ अनिल मेहता ने कहा कि तकनीकी क्षेत्र के विद्यार्थी अपने ज्ञान व कौशल से समाज को अच्छा बनाए। संचालन एन एस एस प्रभारी जय शर्मा ने किया। प्राध्यापक रमेश चंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।