उदयपुर,  माननीय सदस्य सचिव राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के तत्वावधान में श्रीमान ज्ञान प्रकाश गुप्ता जिला एवं सैशन न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर के निर्देशन में दिनांक 8 सितम्बर को केन्द्रीय कारागृह उदयपुर का साप्ताहिक निरीक्षण कुलदीप शर्मा एडीजे एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर द्वारा किया गया है ।

कुलदीप शर्मा एडीजे एवं सचिव ने बताया कि निरीक्षण के दौरान बंदीगण ने शिकायते की जेल के चिकित्सक द्वारा गंभीर बिमारी होने या गहन जांचो हेतु बंदीगण को महाराणा भूपाल चिकित्सालय, उदयपुर हेतु रैफर किया जाने पर पुलिस गार्ड समय पर नहीं आती है, जिससे बंदीगण की स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। अत्यधिक गंभीर स्थिति होने पर भी बंदीगण को ईलाज हेतु महाराणा भूपाल चिकित्सालय में ईलाज हेतु पुलिस गार्ड के अभाव में नहीं ले जाया जाता।
महाराणा भूपाल चिकित्सालय में कैदी वार्ड नहीं है, अधिकांश बंदीगण को जब डॉक्टर हेतु भर्ती करने और जांचे करवाने हेतु लिखा जाता है तो पुलिस गार्ड द्वारा केन्द्रीय कारागृह में जमा करवा दिया जाता है। बंदीगण ने निवेदन किया कि महाराणा भूपाल चिकित्सालय उदयपुर में 50 बेड का कैदी वार्ड स्थापित किया जाना अति आवश्यक है, जिससे अंधिकांश बंदीजन का गंभीर बिमारियों का ईलाज समय पर करवाया जा सके।
साप्ताहिक जेल निरीक्षण के दौरान पाया गया कि हाई सिक्योरिटी वार्ड की दीवारे एवं छत जर्जर अवस्था में आ चुकी है दिवारे एवं छत गिर सकती है। डुंगरपुर जिले के ऐसे बदीगण केन्द्रीय कारागृह उदयपुर में निरूद्ध है जिनके परिजन पिछले दो वर्ष से अधिक समय से मुलाकात हेतु नहीं आए है, कि डुंगरपुर जिले में जिला जेल बनकर तैयार हो चुकी है लेकिन फिर भी उन्हे डुंगरपुर जेल में नहीं रखा जाकर विगत कई वर्षां से उदयपुर के केन्द्रीय कारागृह एवं उदयपुर जिले में उप कारागृहो में रखा गया है। पेशियों पर भी डुंगरपुर जेल में नहीं ले जाना पाया गया। यह अत्यंन्त जांच एवं गंभीरता का विषय है कि डुंगरपुर जिले के कई बंदीगण केन्द्रीय कारागृह उदयपुर में निरूद्ध है एवं उनके प्रकरण मूलतः डुगरपुर मुख्यालय एवं तहसीलो पर स्थित न्यायालयों में विचाराधीन है। डुंगरपुर जेल बनकर तैयार हो चुकी है लेकिन बंदीजन को केन्द्रीय कारागृह में रखा गया है ।
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