उदयपुर। राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के जीवन स्तर में वृद्धि करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई डॉ. भीमराव अम्बेडकर राजस्थान दलित आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना प्रदेश के दलित और आदिवासी वर्ग के उद्यमियों और व्यापारियों को संबल प्रदान कर रही है। इससे इन वर्गों के लोग स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
जिला उद्योग एवं वाणिज्यिक केंद्र के महाप्रबंधक शैलेंद्र शर्मा ने बताया कि योजना के माध्यम से लक्षित वर्गों को उद्योग, सेवा एवं व्यापारिक गतिविधियों से सम्बन्धित परियोजना की स्थापना, विस्तार, विविधिकरण, आधुनिकिकरणके लिए सहायता एवं सुविधाएं प्रदान कर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

यह हैं योजना के प्रावधान
श्री शर्मा ने बताया कि डॉ भीमराव अंबेडकर दलित आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना के तहत आवेदक राजस्थान का मूल निवासी होना तथा आवेदन के समय आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होना आवश्यक है। उद्योग, सेवा एवं व्यापार क्षेत्र हेतु अधिकतम परियोजना लागत क्रमशः 10 करोड रूपए. 5 करोड रूपए एवं 1 करोड रूपए हैं। विनिर्माण एवं सेवा उद्योग की परियोजनाओं में कार्यशील पूंजी की सीमा कुल परियोजना लागत के अधिकतम 40 प्रतिशत तक निर्धारित है। व्यापारिक क्षेत्र में यह सीमा अधिकतम 90 प्रतिशत तक होगी तथा परियोजना लागत की 25 प्रतिशत अथवा 25 लाख रुपए, जो भी कम हो मार्जिन मनी अनुदान राशि होगी।

इतना मिल सकता है ऋण व ब्याज अनुदान
महाप्रबंधक ने बताया कि योजना के तहत विनिर्माण हेतु न्यूनतम अंशदान 10 प्रतिशत एवं अधिकतम ऋण 90 प्रतिशत, सेवा हेतु न्यूनतम अंशदान 10 प्रतिशत एवं अधिकतम ऋण 90 प्रतिशत तथा व्यापार हेतु न्यूनतम अंशदान 15 प्रतिशत एवं अधिकतम ऋण 85 प्रतिशत तक देय है। ऋण की समयावधि 3 से 7 वर्ष तक होगी। ब्याज अनुदान 5 वर्ष तक ही देय होगा। 25 लाख रुपए से कम ऋण पर ब्याज अनुदान 9 प्रतिशत, 25 लाख से 5 करोड़ रूपए तक पर 7 प्रतिशत तथा 5 करोड़ से 10 करोड़ रुपए तक के ऋण पर ब्याज अनुदान 6 प्रतिशत निर्धारित है।

यूं कर सकते हैं आवेदन
योजना का लाभ लेने के लिए एसएसओ आईडी के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के साथ जन आधार, जाति प्रमाण पत्र, परियोजना रिपोर्ट, आधार कार्ड, शैक्षणिक योग्यता की अंकतालिकाजैसे दस्तावेजों की आवश्यकता रहती है।