रैगिंग हमारे देश की उच्च शिक्षा प्रणाली में एक विचलित करने वाली सच्चाई है।

इस तथ्य के बावजूद कि पिछले कुछ वर्षों में रैगिंग ने सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान ली है और हज़ारों मेधावी छात्रों का करियर बर्बाद किया हैकई लोग अभी भी इस प्रथा को कॉलेज जाने वाले छात्रों के लिए "परिचित" और "वास्तविक दुनिया से परिचय" का एक तरीका मानते हैं।

इस क्षेत्र में कार्यरत अन्य संगठनों/संस्थाओं ने भी रैगिंग को परिभाषित करने का प्रयास किया हैहालाँकि परिभाषाओं की विविधता दृष्टिकोण में भिन्नता को दर्शाती है। मुख्य अतिथि अधिष्ठाता डॉ मनोज कुमार महला ने बताया कि  सभी संस्थानों में चली आ रही है इस बीमारी के जो दुष्परिणाम सामने आए हैं उनसे भी आप सब लोग वाकिफ हैं एक छात्र जब कॉलेज में आता है तो वह नई उम्मीद लेकर मंच का उपयोग करें और डॉ के. के. यादव में रैगिंग की सम्पूर्ण जानकारी दी.  इस अवसर पर डॉ. एस एस  लखावत ADSW,  डॉ सी पी. नामाराम नारायण कुम्हार उपस्थित रहे.