उदयपुर। “नवसंवत्सरः मंगलमयः भवतु” एवं “भारतीय-नववर्षस्य हार्दाः शुभाशयाः” जैसे संस्कृत उद्घोषों के साथ उदयपुर शहर के भट्टा चौराहे पर आयोजित अभिनव जनसंपर्क कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना दिया। भारतीय नववर्ष समाजोत्सव समिति के तत्वावधान में संस्कृत भारती द्वारा आयोजित इस विशेष पहल में आमजन को संस्कृत भाषा में नववर्ष की शुभकामनाएं देकर भारतीय संस्कृति से जोड़ने का सशक्त प्रयास किया गया।

कार्यक्रम के अंतर्गत संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं ने बस, ऑटो, साइकिल चालकों एवं श्रमिक वर्ग सहित समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाते हुए “नववर्षस्य अभिनन्दनम्” एवं “मातृभूमिः भारतम्, मातृभाषा संस्कृतम्” जैसे संदेशों के माध्यम से नववर्ष का अभिनंदन किया। संस्कृत में दी गई शुभकामनाएं आमजन के लिए एक नवीन और रोचक अनुभव साबित हुईं, जिससे लोगों में उत्सुकता एवं प्रसन्नता का वातावरण निर्मित हुआ।

इस अवसर पर कार्यकर्ताओं द्वारा तिलक लगाकर मिश्री, काली मिर्च एवं नीम की कोपलों का वितरण किया गया। भारतीय परंपरा में इनका विशेष महत्व माना जाता है, जो स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और नवचेतना के प्रतीक हैं। इस पारंपरिक स्वागत शैली ने कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक एवं प्रभावी बना दिया।

भट्टा चौराहे पर दिनभर उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा। राह चलते नागरिक, वाहन चालक एवं स्थानीयजन इस अभिनव पहल से प्रभावित होकर उत्साहपूर्वक जुड़ते नजर आए। कार्यक्रम ने न केवल नववर्ष के स्वागत को विशेष बनाया, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण और जनसंवाद का भी प्रभावी संदेश दिया।

संस्कृत भारती की इस पहल ने यह स्थापित किया कि भारतीय नववर्ष केवल एक तिथि नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक एकता का प्रतीक है। कार्यक्रम में महानगर शिक्षण प्रमुख श्रीयांश कंसारा, प्रचार प्रमुख रेखा सिसोदिया, महानगर मंत्री नरेंद्र शर्मा, प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ. यज्ञ आमेटा एवं प्रांत श्लोक पाठन केंद्र प्रमुख डॉ. रेनू पालीवाल सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।