उदयपुर | विज्ञान समिति के दर्शन विज्ञान प्रकोष्ठ के अन्तर्गत आज 'बौद्ध धर्म-दर्शन का सामाजिक सरोकार' विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मुख्य वक्ता प्रोफेसर प्रेमसुमन जैन ने बताया कि बौद्ध परंपरा में शील, समाधि और प्रज्ञा का उपयोग करते हुए शरीर की शुचिता, वाणी की शुचिता तथा मन की शुचिता द्वारा जीवन को उन्नत करने की शिक्षा दी गई है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एम.एल. कछारा ने की। डॉ. कछारा ने जैन धर्म और बौद्ध धर्म के विकास के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
मीडिया प्रभारी प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम संयोजक डॉ. पारसमल अग्रवाल, विज्ञान समिति के कुलप्रमुख डॉ. के.एल. कोठारी, डॉ. के.पी. तलेसरा, डॉ. के.एल. तोतावत, मुनीश गोयल, आर.एल. मुंशी, डॉ. पुष्पा कोठारी, डॉ. एस.एल. गोदावत, इंजी. आर.के. चतुर्वेदी, राजेन्द्र खोखावत आदि ने चर्चा में भाग लेकर विषय को समृद्ध बनाया।