उदयपुर। यदि कोई व्यक्ति समाज के विरुद्ध अपराध करे तो उसे जेल होती है, यदि कोई राष्ट्र के विरुद्ध अपराध करे तो उसे देशद्रोही कहा जाता है, लेकिन यदि कोई अपनी ही आत्मा के विरुद्ध अपराध करता रहे तो उसका क्या? इसी गहन और विचारोत्तेजक प्रश्न के साथ डबोक स्थित शाश्वत धाम में श्री कुन्द कुन्द कहान वीतराग विज्ञान शिक्षण समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय जैन एज्यूकेशनल केम्प में विशेष आध्यात्मिक प्रवचन “क्या मैं सबसे बड़ा अपराधी हूँ? में मेाटिवेशनल स्पीकर एवं चिंतक डॉ.एस.पी. भारिल्ल ने आत्मकल्याण, जीवन के उद्देश्य और आत्मजागरण पर प्रभावशाली विचार व्यक्त किए।
शिक्षण समिति के निदेशक, शाश्वत धाम के मंत्री एवं राजस्थान गौरव डॉ. जिनेंद्र शास्त्री ने बताया कि यह केवल एक प्रवचन नहीं, बल्कि आत्मा को झकझोर देने वाला दर्पण था, जिसने प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं को कटघरे में खड़ा कर अपने जीवन की दिशा पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवनभर दूसरों के दोष, कमियाँ और अपराध खोजने में लगा रहता है, लेकिन अपने सबसे बड़े अपराध को नहीं पहचान पाता। वह अपराध है,दुर्लभ मनुष्य जन्म को व्यर्थ गंवा देना, आत्मा के कल्याण के लिए कोई प्रयास न करना और सांसारिक उपलब्धियों की दौड़ में ही पूरा जीवन समाप्त कर देना।
उन्होंने कहा कि जीवन निरंतर समाप्त हो रहा है। समय हाथों से रेत की तरह फिसल रहा है, युवावस्था क्षीण हो रही है और मृत्यु प्रत्येक क्षण निकट आती जा रही है, फिर भी मनुष्य स्वयं को इस भ्रम में रखता है कि उसके पास अभी बहुत समय है। उन्होंने कहा कि जब भरत चक्रवर्ती, भगवान राम और लक्ष्मण जैसे महापुरुष भी शरीर छोड़कर चले गए तो सामान्य मनुष्य किस आधार पर स्थायित्व का भ्रम पाल सकता है।
प्रवचन के दौरान उन्होंने अपराधियों की पाँच श्रेणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहला और सबसे बड़ा अपराधी वह है जिसे यह भी समझ नहीं कि संसार वास्तव में दुःखमय है। वह दुःख को ही सुख समझकर जीता रहता है और अपने बंधनों को उपलब्धि मान बैठता है। उन्होंने कहा कि संसार का सबसे बड़ा दुःख स्वयं दुःख नहीं, बल्कि दुःख का बोध न होना है।
उन्होंने एक मार्मिक प्रश्न रखते हुए कहा कि यदि मैंने किसी की हत्या नहीं की, किसी का धन नहीं छीना, किसी को धोखा नहीं दिया, लेकिन अपने मनुष्य जन्म को व्यर्थ गंवा दिया, तो क्या मैं निर्दाेष हूँ?” उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक अपराध केवल बाहरी पाप नहीं, बल्कि सत्य को जान लेने के बाद भी अपने जीवन में परिवर्तन न करना है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म एक साधारण अवसर नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा “गेम चेंजर” अवसर है। यहीं से जीव मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर हो सकता है अथवा पुनः अनंत भवों के चक्र में भटक सकता है। इसलिए सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि हमने संसार में क्या पाया, बल्कि यह है कि हमने अपनी आत्मा के लिए क्या किया।
प्रवचन के अंतिम चरण में भारिल्ल ने भावपूर्ण आह्वान करते हुए कहा कि अब और किसी संकेत की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। यदि जीवन का उद्देश्य आत्मकल्याण है तो उसका निर्णय आज और अभी लेना होगा। बीता हुआ समय लौटकर नहीं आएगा, लेकिन वर्तमान क्षण जागृति का अवसर अवश्य बन सकता है।
इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष शान्तिलाल जैन,शाश्वत धाम के ट्रस्टी चंादमल कीकावत,मुमुक्षु समाज के महामंत्री अभय बण्डी, दिगम्बर जैन बीसा नरसिंहपुरा तेरापंथ आमनाय के अध्यक्ष योगेश अखावत,सकल नरसिंहपुरा समाज के महामंत्री अनिल मेहता,श्री दिगम्बर दसा नरसिंहपुरा मुमुक्षु समाज भीण्डर के महामंत्री सुरजमल फान्दोत,दिगम्बर जैन आदिनाथ चेरिटेबल ट्रस्ट से. 11 के अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा,श्री दशा हूमड़ समाज के अध्यक्ष रमेश शाह,चन्द्रवीर सेवा संस्थान के अध्यक्ष सुन्दरलाल डागरिया, दशा नरसिंहपुरा तेरापंथ समाज के अध्यक्ष शेखर जेतावत, चित्तौड़ा समाज के अध्यक्ष सुरेश पदमावत,दशा हूमड़ समाज के अध्यक्ष देवेन्द्र छाप्या,कुन्द कुन्द वीतराग वितराग विज्ञान शिक्षण समिति के महामंत्री राजमल जैन,समाज सेवी डॉ.श्याम एस. सिंघवी,ओसवाल समाज के महामंत्री आलोक पगारिया बतौर अतिथि मौजूद थे। समारोह का संचालन डॉ.महावीर प्रसाद शास्त्री ने किया। समारोह का शुभारम्भ अर्पिता जैन के मंगलाचरण से हुआ। अतिथियों का समिति की ओर से स्वागत किया गया। राजमल गोदड़ोत ने स्वागत उद्बोधन दिया। शिविर में 183 बालक-बालिकाओं ने अपना पंजीकरण कराया है।
इस अवसर पर नृपेन्द्र जैन, पं. खेमचन्द जैन, डॉ. महावीर प्रसाद शास्त्री, पं. ऋषभ शास्त्री,डॉ. तपिश शास्त्री, पं.राजकुमार जैन दर्शनाचार्य, राकेश दलावत,पं. गजेन्द्र जैन,मनोहर भोरावत,आदि समिति के पदाधिकारी मौजूद थे। अंत में आभार प्रचार मंत्री डॉ. निलेश शास्त्री ने व्यक्त किया।
Udaipur
दूसरों के नहीं, अपने जीवन का हिसाब करेंःएस.पी. भारिल्ल
भारिल्ल का आत्मजागरण का संदेश, ‘क्या मैं सबसे बड़ा अपराधी हूँ?’ प्रवचन ने झकझोरा
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