जैसलमेर । सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जैसलमेर द्वारा जिला कारागृह का निर्धारित एक्शन प्लान अनुसार साप्ताहिक निरीक्षण किया गया। दौराने निरीक्षण प्रिजन लीगल एड क्लिनिक एवं लीगल एड हेल्प डेस्क (मुलाकात से न्याय तक) पर पैरा लीगल वॉलियंटर द्वारा संधारित किए जाने वाले रजिस्टर/फॉरमेट्स का अवलोकन किया। कारागृह में निरूद्ध विचाराधीन बंदियों से वार्ता कर उनकी समस्याओं का सुना गया। कारागृह के परिसर में बने बैरक, रसोई, क्लिनिक, कार्यालय आदि की साफ-सफाई समुचित पाई गई, बंदियों को डाईट स्केल के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। कारागृह में बने डिस्पेंसरी का निरीक्षण किया गया जिसमें एक नर्स व फार्मासिस्ट कार्यरत हैं।

       निरीक्षण के दौरान सभी बंदियों से वार्ता किया जाने पर पाया गया कि सभी बंदियों के पास अपने अधिवक्ता उपलब्ध होना बताया। ऐसा कोई बंदी नहीं बताया गया जिसके पास अधिवक्ता सेवा नहीं हो। यूटीआरसी की श्रेणी में आने वाले बंदी जिसने 1/2 अथवा 1/3 सजा पूरी की हो और जमानत प्राप्त न कर सका हो, ऐसा कोई बंदी जो जमानत के बावजूद जेल में निरूद्ध हो, महिला बंदी, सजायाफ्ता बंदी निरूद्ध नहीं बताया गया।

      निरीक्षण के बाद जिला कारागृह में बंदियों के हितार्थ राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ललित पुरोहित ने जिला कारागृह का साप्ताहिक निरीक्षण कर ‘सशक्त युवा-सशक्त भारत‘ विषय पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया। शिविर में सचिव ने जानकारी देते बंदियों को उनके विधिक अधिकार, नालसा एवं रालसा द्वारा चलायी जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई।

      शिविर में उन्होंने बंदियों को बताया कि प्रत्येक बंदी को भारतीय संविधान के अनुसार गरीमामय जीवन जीने का बुनियादी अधिकार प्राप्त है। मुख्य उद्देश्य युवाओं को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना और देश के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था।

     सचिव ने बताया कि आज का युवा देश की सबसे बडी ताकत है। जब युवा कानूनी रूप से जागरूक, शिक्षित और सशक्त होंगे तभी विकसित भारत का संकल्प वास्तविक रूप से साकार हो सकेगा। उन्होनें युवाओं को नशे से दूर रहने, अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने का आह्वान किया। साथ ही बंदियों से मुलाकात करते हुए सचिव ने बताया कि कोई भी बंदी कभी भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मुफ्त विधिक सहायता प्राप्त कर सकता है इस संबंध में लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अधिवक्तागण समय-समय पर जेल विजिट करते हैं एवं इसके लिए लीगल एड क्लिनिक पर पीएलवी एवं फार्म उपलब्ध है।