उदयपुर। फेडरेशन ऑफ इंडियन ग्रेनाइट एंड स्टोन इंडस्ट्री (फिग्सी) की ओर से “माइनिंग एट क्रॉसरोड्सकृरेगुलेशन एंड रियलिटी” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
इसमें खनन क्षेत्र की नियामक चुनौतियों, पर्यावरण संरक्षण, नियमों के अनुपालन और प्राकृतिक पत्थर उद्योग के भविष्य को लेकर विशेषज्ञों ने मंथन किया।
फिग्सी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ईशविंदर सिंह ने कहा कि खनन उद्योग की दीर्घकालीन प्रगति के लिए संतुलित नियमन के साथ सतत विकास पर जोर देना आवश्यक है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी रहे।
खान एवं भू-विज्ञान विभाग के अतिरिक्त निदेशक (मुख्यालय) तथा माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमईएआई), राजस्थान चैप्टर-उदयपुर के अध्यक्ष महेश माथुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।महेश माथुर ने कहा कि खनन क्षेत्र परिवर्तन के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है।
ऐसे में नियमन, पर्यावरणीय जिम्मेदारी, तकनीक और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
उन्होंने नियमों के अनुपालन के लिए उद्योग जगत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग व्यावहारिक समस्याओं और उचित सुझावों पर सकारात्मक रूप से विचार करने के लिए तैयार है।उन्होंने बताया कि राजस्थान के खान मालिकों ने 50 लाख से अधिक पौधे लगाए हैं, जिनकी जीवित रहने की दर 90 प्रतिशत से अधिक है।
देश की करीब 60 हजार खनन लीज में से लगभग 20 हजार राजस्थान में हैं। राज्य को खनन से करीब 10,500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है, जबकि चालू वर्ष का लक्ष्य 14 हजार करोड़ रुपये है।
राजस्थान अब तक 141 प्रमुख खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर देश में अग्रणी स्थान हासिल कर चुका है।
साथ ही राज्य ने देश के पहले रेयर अर्थ एलिमेंट्स ब्लॉक की नीलामी भी की है।माथुर ने कहा कि खनिज ब्लॉकों की नीलामी बाजार की मांग और आपूर्ति के उचित आकलन के आधार पर होनी चाहिए।
फिलहाल अतिरिक्त ग्रेनाइट ब्लॉकों की नीलामी की आवश्यकता नहीं है, जबकि ग्रीन मार्बल खानों के विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने एम-सैंड नीति को प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।अगले दस वर्षों की जरूरतों पर विशेषज्ञ मंथनएमईएआई के सचिव डॉ. हितांशु कौशल ने “भारत में प्राकृतिक पत्थर खनन का भविष्यकृअगले दस वर्षों में क्या बदलाव आवश्यक हैं” विषयक विशेषज्ञ पैनल का संचालन किया।
चर्चा में बदलते नियामक ढांचे, आधुनिक तकनीक, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, वैज्ञानिक खनन, कौशल विकास तथा उद्योग और सरकार के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।डॉ. कौशल ने प्राकृतिक पत्थर उद्योग की मौजूदा चुनौतियों और आगामी दस वर्षों की आवश्यकताओं से जुड़े प्रश्न विशेषज्ञों के समक्ष रखे।
विशेषज्ञों ने खनन प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाने, नई तकनीक अपनाने, संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग तथा भारतीय प्राकृतिक पत्थर उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के उपायों पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, तकनीकी विशेषज्ञों और खनन अभियंताओं के बीच निरंतर संवाद उद्योग के भविष्य के लिए आवश्यक है।
एमईएआई कार्यकारिणी सदस्य कमलेश्वर बारेगामा ने राजस्थान की खनन नीति एवं ग्रेनाइट खानों से संबंधित आंकड़ों की जानकारी दी।संगोष्ठी में एमईएआई राजस्थान चैप्टर-उदयपुर के उपाध्यक्ष आसिफ अंसारी, एमईएआई राजस्थान चैप्टर के सदस्य जिनेश हुमड़, पी.आर. अमेटा सहित फिग्सी के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।