उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, उदयपुर के तत्वावधान में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान उपाध्याय डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि लोभ समस्त पापों का मूल आधार है।

लोभ के पीछे ही जीवन में समस्त दुर्गुणों का आवागमन रहता है। उन्होंने कहा कि लोभ के कारण व्यक्ति अन्याय, हिंसा, झूठ, चोरी, असंयम और मनमुटाव जैसी प्रवृत्तियों में फंस जाता है।उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ते झगड़ों और विवादों का मूल कारण भी कहीं न कहीं लोभ ही है।

इसी के चलते कई बार व्यक्ति अपने ही परिवार में रिश्तों की मर्यादा भूल जाता है और छोटी-छोटी बातों को लेकर संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

लोभ मनुष्य के विवेक को कमजोर कर देता है और उसे गलत मार्ग की ओर ले जाता है।उपाध्याय मुनि ने कहा कि भगवान महावीर ने लोभ का त्याग करने का संदेश दिया है।

गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण ने लोभ को मनुष्य के पतन का कारण बताया है। उन्होंने कहा कि जीवन में शांति और संतोष के लिए परिग्रह का त्याग तथा अपरिग्रह धर्म का आचरण आवश्यक है।उन्होंने कहा कि अनासक्त योग के माध्यम से ही व्यक्ति लोभ और मोह से ऊपर उठ सकता है।

मानव मन की अनंत लालसाएं जीवन को अशांत बनाती हैं।

इच्छाओं पर नियंत्रण और संतोष का भाव ही जीवन को सार्थक एवं सुखमय बना सकता है।उपाध्याय डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि साधु-संतों एवं श्रावक-श्राविकाओं का यह दायित्व है कि वे संयम, त्याग और अपरिग्रह के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं।

इससे व्यक्ति के जीवन में शांति, संतोष और सद्भाव की स्थापना होगी तथा समाज में भी आपसी प्रेम एवं भाईचारा मजबूत होगा।