विज्ञान समिति, उदयपुर के तत्वावधान में दिनांक 24 अगस्त 2026 को डॉ. टीना चौहान (फिजियोथेरेपिस्ट) द्वारा "दैनिक जीवन में गिरने से कैसे बचें" विषयक एक विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।

उन्होंने बताया कि मस्तिष्क और मांसपेशियों के समन्वय से ही गिरने से बचा जा सकता है।

वरिष्ठ नागरिकों की अस्थियाँ धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं और गिरने पर घातक परिणाम हो सकते हैं; अतः उन्होंने पहले विभिन्न प्रकार से अपनी अवस्था को जाँचने एवं चेतावनी संदेश को पहचानने के सुगम तरीके बताए व व्यायाम प्रदर्शित किए और श्रोताओं को आवश्यक व्यायाम कराये जिससे उस संकेतों पर काबू पाया जाय ।

डॉ चौहान के स्लाइड एवं विडियो की सुस्पष्ट प्रस्तुति की सभी ने सराहना की।

मीडिया प्रभारी प्रो विमल शर्मा ने वार्ता की महत्वत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया उम्रदराज व्यक्तियों में गिरना केवल अस्थि-भंग का कारण नहीं बनता, बल्कि इससे शारीरिक क्षमता में दीर्घकालिक कमी, आत्मनिर्भरता का ह्रास और मानसिक स्वास्थ्य (जैसे अवसाद और चिंता) पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं।

साथ ही, गिरने से उत्पन्न जटिलताओं के कारण उपचार और पुनर्वास की लागत बढ़ जाती है, जो परिवार और स्वास्थ्य प्रणालियों पर आर्थिक बोझ डालती है।

अतः ऐसे व्यायाम एवं सावधानियों पर आधारित शैक्षिक सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये न सिर्फ दुर्घटनाओं की रोकथाम करते हैं बल्कि वरिष्ठ नागरिकों की जीवन-गुणवत्ता और सामाजिक सहभागिता को भी बनाए रखने में मदद करते हैं।

आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता इंजी. आर. के. चतुर तथा संयोजक मुनीश गोयल ने वक्ता का स्वागत करते हुए विषय-वस्तु का संक्षिप्त परिचय दिया। वार्ताकार का परिचय डॉ. के. पी. तलेसरा ने दिया तथा कार्यक्रम का संचालन महासचिव डॉ. रूप किशोर गर्ग ने किया।

कार्यक्रम में डॉ. के. एल. तोतावत, इंजी. आर. के. खोखावत, डॉ. आर. के. दशोरा, डॉ. सुजान सिंह, डॉ विमल शर्मा, इंजी. एस. सी. के. वेद, रेणु भण्डारी, डॉ. डी. एन. दाणी, डॉ. एम. पी. शर्मा, इंजी. एम. पी. जैन, अविनाश भटनागर एवं अन्य 35 गणमान्य सदस्य उपस्थित थे।

धन्यवाद संदेश कुलप्रमुख डॉ. के. एल. कोठारी ने प्रेषित किया।