उदयपुर। राष्ट्र संत महामंडलेश्वर ईश्वरानन्द ब्रह्मचारी उपाख्य उत्तम स्वामी महाराज ने आह्वान किया है कि हर हिन्दू घर से निकलने से पहले तिलक अवश्य लगाए। साथ ही, सप्ताह या महीने में एक बार सामूहिक भजन और सामूहिक भोजन अवश्य करे। पंगत की संगत ही सामाजिक समरसता का आधार है।
वे रविवार को यहां बड़गांव पंचायत समिति मैदान में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में उपस्थित विराट जनमैदिनी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बांग्लादेश में हो रही घटनाओं पर भी चिंता जताते हुए कहा कि हिन्दू धर्म ने कभी किसी को लूटा नहीं, गुलाम नहीं बनाया, न ही मतांतरण का प्रयास किया, लेकिन हिन्दू समाज को हमेशा तोड़ने की कोशिश की गई। आज भी लगातार प्रहार हो रहे हैं। हिन्दू समाज के लिए प्रकृति भी देवता है, पेड़, पशु, पक्षी सभी देव स्वरूप माने गए हैं। सम्पूर्ण सृष्टि की संरक्षा की कामना सनातन संस्कारों में निहित है।
उन्होंने कहा कि समाज की एकजुटता और समरसता ही हिन्दुत्व की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने 16 संस्कारों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे पवित्र संस्कार भारतवर्ष की सनातन संस्कृति में ही विद्यमान हैं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और प्रसिद्ध पत्रकार एवं टीवी एंकर रूबिका लियाकत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मातृशक्ति का सम्मान कुटुंब का आधार है। जहां नारी की पूजा होती है, वहीं देवताओं का वास होता है। ऐसा सिर्फ भारतीय सनातन संस्कृति, समाज और धर्म में कहा गया है। सनातन में संस्कारों का प्रथम स्रोत ही माता हैं, जबकि विदेशी विचारक भारतीय महिला को पिंजरे में कैद पंछी के समान बताते आए हैं। उन्होंने कहा कि परिवार में गुस्सा व अहंकार नहीं करना चाहिए। भोगवाद ने सबकुछ नष्ट कर दिया है, इससे बचना होगा।
हिंदू संस्कृति ही विश्व शांति का आधार - अजीत महापात्र
-धर्म सभा में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख अजीत महापात्र ने संघ की स्थापना की रूपरेखा बताते हुए संघ की शाखा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य व्यक्ति के व्यक्तित्व में सनातन संस्कृति, भारतवर्ष के ऐतिहासिक गौरव का समावेश है, ताकि उसे अपने इतिहास और संस्कृति पर गर्व है।
उन्होंने कहा कि भारत ही विश्व शांति का आधार है। भारत अर्थात् विविधता को स्वीकार करने वाला, आलोचना को सकारात्मक रूप से अपनाने वाला, सर्वसमावेशी व सर्वेशामअविरोधेन का अपनाने वाला है। बुद्ध व महावीर से ज्ञानेश्वर, शंकर देव, तुकाराम, कबीर, नानक देव सभी को मानने वाले भारत में रहते हुए एक दूसरे का सम्मान करते हैं। यही हिंदुत्व है।
महापात्रा ने कहा कि हमारी समस्याएं एवं कुरीतियां ही हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं। इन दोनों से मुक्त हिन्दू समाज विश्व को नई दृष्टि देगा। दोष मुक्त हिंदू समाज खड़ा करना हमारा परम उद्देश्य होना चाहिए। हम में स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य भी होना चाहिए। देशभक्ति, अपना गौरवपूर्ण इतिहास, हमारा संविधान, हमारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम, राष्ट्रगान जन गण मन, तिरंगा इन सबको समझना उनके प्रति हमारा सम्मान, श्रद्धा, विश्वास कैसे बढे़ इस पर काम करें।
उन्होंने कहा कि सामाजिक समस्याओं से जूझ रहे पश्चिम में हिंदुत्व पर सैकड़ों लोग पीएचडी कर रहे हैं, पूरी दुनिया में वेद, उपनिषद और रामायण पढ़ाने वालों की मांग बढ़ रही है। सभी को हिंदुत्व में भविष्य दिखाई दे रहा है। भारतीय विवाह संस्था, भारतीय संस्कार व्यवस्था की ओर पूरी दुनिया खींची चली आ रही है।
सभा के आरम्भ में अतिथियों के स्वागत में आयोजन समिति के अध्यक्ष ओमशंकर श्रीमाली ने स्वागत उद्बोधन दिया। वहीं हिन्दू सम्मेलन की भूमिका रखते हुए आयोजन समिति के संयोजक डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की कठिन किंतु परिणामकारी यात्रा ने देश में स्व का भाव और स्वदेशी का भाव जागृत किया है।
इससे पूर्व, कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का पारम्परिक रूप से शॉल, उपरणा, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। वहीं वरिष्ठ पत्रकार रुबिका लियाकत को विशेष रूप से चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
महामण्डलेश्वर ईश्वरानन्द ब्रहाचारी उपाख्य उत्तम स्वामी महाराज का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष ओमशंकर श्रीमाली के नेतृत्व में वेलाराम गमेती (भोपा जी), चोसरदास, जयन्त कोठारी एवं नरेन्द्र सुधार द्वारा किया गया। वरिष्ठ पत्रकार रुबिका लियाकत का स्वागत केसर देवी, बबली बाई, नीरू श्रीमाली, कोयल, दिव्या दीपाली योगी एवं श्रीमती गीता गुप्ता ने किया। वहीं अजीत महापात्र का स्वागत डॉ. अनिल मेहता, मांगीलाल प्रजापत, डालचन्द एवं उदय सिंह द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के आरम्भ में पंच परिवर्तन विषय पर विषय प्रवर्तन किया गया। इस क्रम में मीना सिंघवी ने कुटुम्ब प्रबोधन पर अपने विचार रखे, कल्पना प्रजापत ने स्वत्त्व के जागरण पर प्रकाश डाला, डॉ. कामिनी सुथार शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया, वैशाली गमेती ने नागरिक शिष्टाचार पर विचार व्यक्त किए, जबकि लविश श्रीमाली ने सामाजिक समरसता विषय पर अपना वक्तव्य रखा।
कार्यक्रम के दौरान स्वस्ति वाचन एवं गणेश वंदना विद्यानिकेतन बड़गांव के विद्यार्थियों द्वारा की गई, जिसने सम्पूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक और संस्कारमय बना दिया। कार्यक्रम के अन्त में आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों, अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार प्रदर्शन जयंत कोठारी द्वारा किया गया।
(शोभायात्रा का समाचार)
बड़गांव में मातृशक्ति ने गुंजाया सनातन की अलख का संदेश
-2500 महिलाएं लेकर चलीं कलश, गाए मंगल गान
-शोभायात्रा में उमड़ा समूचा बड़गांव
उदयपुर, 18 जनवरी। उदयपुर शहर का बड़गांव रविवार को उस समय सनातनी उत्सव के माहौल में रंग गया जब विराट हिन्दू सम्मेलन के तहत शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ और शोभायात्रा में बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने सिर पर कलश धारण किए मंगलाचार गुंजाया। ऐसा प्रतीत हुआ कि लाल चुन्दड़ी धारण किए हिन्दू समाज की माताएं सनातन की परम्पराओं और संस्कारों की अलख जगाने के संकल्प का जयघोष कर रही हों। स्थिति यह बनी कि कई माताएं-बहनें कलश से वंचित रह गईं तो वे भजनों-मंगल गीतों पर नाचते-गाते चलीं। सनातन प्रतीकों, महापुरुषों की झांकियों से सजी शोभायात्रा बालकेश्वर महादेव मंदिर से जैसे-जैसे बड़गांव मुख्य मार्ग होते हुए बड़गांव पंचायत समिति मैदान की ओर बढ़ी, पग-पग पर स्वागत करते समाजजन स्वागतोपरांत शोभायात्रा के साथ होते चले। पूरी शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, योगेश्वर कृष्ण, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी के जयकारे लगाते चले। मेवाड़ के आराध्य एकलिंगनाथ, चारभुजानाथ के जयकारों से भी गगन गूंजा।
सनातन संस्कृति की अलख और हिन्दू समाज की एकजुटता की इस विराटता के दर्शन कर हर कोई अभिभूत हो उठा। शोभायात्रा में स्थानीय संत-महंतों का भी सान्निध्य रहा। बग्घी में बिराजमान संत-वृंद सभी को आशीर्वाद प्रदान करते चले। शोभायात्रा के अग्रभाग में मंगल धुन बजाते बैण्ड तथा मेवाड़ी गीत और भजन गाते कलाकार चले। इसके पश्चात निशान के रूप में दो घोड़े और दो सजे-धजे ऊंट शोभायात्रा की शोभा बने। इनके पीछे घोड़े पर सवार झांसी की रानी की झांकी आकर्षण का केंद्र रही।, मंगलगान गाती हुई मातृशक्ति ने पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया। शोभायात्रा में हनुमान जी का रूप धारण किए एक युवक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं रथों पर भारत माता, महादेव, बाप्पा रावल, महाराणा प्रताप, हाड़ीरानी सहित सनातन परम्परा और मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को दर्शाती झांकियां लोगों में श्रद्धा, गौरव और शौर्य का भाव जागृत करती रहीं।
Udaipur
हर हिन्दू घर से निकलने से पहले लगाए तिलक – उत्तम स्वामी महाराज
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