उदयपुर। माईनिंग इंजिनियर्स एसोसिएशन ऑॅफ इण्डिया, राजस्थान चेप्टर, उदयपुर ने आज चैप्टर ऑफिस में सस्टेनेबल माईनिंग ट्रासंर्फोमेशन(सतत खनन परिवर्तन) विषयक तकनीकी वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लगभग 30 खनि अभियताओं तथा भूवैज्ञानिकां ने भाग लिया।
मुख्य वक्ता आरिफ मोहम्मद शेख, माईनिंग इंजीनियर (विजिलेंस) उदयपुर, खान एवं भूविज्ञान विभाग थे। मुख्य वक्ता का स्वागत डॉ. एस एस राठौड़, सचिव आसिफ एम अंसारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता ने अपने प्रजेंटेशन में उपरोक्त विषय पर बताया कि सस्टेनेबल माईनिंग ट्रासंर्फोमेशन खनन क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग एवं दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए “सतत खनन पद्धतियाँ ;ैनेजंपदंइसम डपदपदह च्तंबजपबमेद्ध विषय पर एक विस्तृत तकनीकी व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर खनन उद्योग में अपनाई जा रही आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल एवं नवाचार आधारित तकनीकों पर गहन चर्चा की गई।
व्याख्यान में बताया गया कि सतत खनन का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करना है जिससे पर्यावरण को न्यूनतम क्षति पहुँचे और आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रहें। संसाधन दक्षता, अपशिष्ट न्यूनिकरण, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण को सतत खनन के प्रमुख स्तंभ बताया गया।
कार्यक्रम में डिजिटल एवं स्वचालित खदानों, स्वायत्त मशीनरी, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस तथा डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली जैसी तकनीकों पर प्रकाश डाला गया, जिनसे ईंधन की बचत, सुरक्षा में वृद्धि एवं उत्पादन क्षमता में सुधार संभव है। इसके साथ ही सौर एवं पवन ऊर्जा के उपयोग, इलेक्ट्रिक एवं बैटरी चालित खनन वाहनों तथा हरित ऊर्जा परियोजनाओं के सफल उदाहरण प्रस्तुत किए गए।
परिपत्र अर्थव्यवस्था की अवधारणा के अंतर्गत टेलिंग्स के पुनः उपयोग, पेस्ट फिलिंग, बायो-माइनिंग एवं फाइटो-माइनिंग जैसी तकनीकों को अपशिष्ट से संसाधन निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया। जल प्रबंधन एवं संरक्षण पर चर्चा करते हुए जल पुनर्चक्रण, क्लोज्ड-लूप सिस्टम तथा वर्षा जल संचयन के महत्व को रेखांकित किया गया।
खनन पश्चात भूमि पुनर्वास एवं भू-दृश्य पुनर्स्थापन पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण तथा परित्यक्त खनन क्षेत्रों को इको-टूरिज्म एवं सामाजिक उपयोग में परिवर्तित करने के उदाहरण साझा किए गए।
साथ ही, राष्ट्रीय खनिज नीति 2019, राजस्थान खनिज नीति 2024 एवं राजस्थान एम-सैंड नीति 2024 जैसे नीतिगत प्रावधानों की जानकारी दी गई, जो वैज्ञानिक, सुरक्षित एवं पर्यावरणीय रूप से सतत खनन को प्रोत्साहित करते हैं। कार्यक्रम का निष्कर्ष यह रहा कि सतत खनन पद्धतियाँ न केवल पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करती हैं, बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता एवं दीर्घकालिक आर्थिक लाभ के लिए भी अनिवार्य हैं।
प्रशनोतरी काल के दौरान डॉ. एस के वशिष्ट व डॉ हितांशु कौशल ने अपनी बात रखी। अंत में धन्यवाद आसिफ एम अंसारी, सचिव एमईएआई ने ज्ञापित किया व कार्यक्रम का संचालन डाँ. हितांशु कौशल, सयुक्त सचिव ने किया।
Udaipur
सस्टेनेबल माईनिंग ट्रासंर्फोमेशन पर वार्ता आयोजित
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