उदयपुर। कालीवास में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में जनजाति समाज सहित ग्रामवासी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संत चरण दास जी पलाना गादीपति ने अपने उद्बोधन में कहा कि भील आदिवासी सनातनी हिंदू हैं। उन्होंने बताया कि भील समाज की उत्पत्ति महादेव की जंगा से काली बेल के रूप में मानी जाती है, इसी कारण वे भगवान शिव को मानते हैं। भील समाज मां गोरकिया माता, रामदेव जी की पूजा करता है और सनातन परंपराओं से जुड़ा है। उन्होंने समाज से अपने धर्म पर अडिग रहने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सह सेवा प्रमुख नरेंद्र कुमार, ने कहा कि हिंदू वह है जो जीव-जगत की चिंता करता है, चींटी से लेकर पशु-पक्षियों तक का संरक्षण करता है, सभी विचारों का सम्मान करता है, प्रकृति की रक्षा करता है और नर सेवा को ही नारायण सेवा मानता है। उन्होंने कुटुंब, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों के पालन पर भी जोर दिया।

सम्मेलन के निमित्त हवन कराने वाले आचार्य किशनलाल आमेटा ने कहा कि सनातन संस्कृति को तोड़ने के लिए षड्यंत्रपूर्वक समाज में ऊंच-नीच का भेद डाला गया, जबकि हिंदू समाज में इसका कोई स्थान नहीं था। उन्होंने भगवान श्रीराम द्वारा मां शबरी के जूठे बेर स्वीकार करने और निषादराज को सम्मान देने का उदाहरण देते हुए समरस समाज की आवश्यकता पर बल दिया।

हिंदू सम्मेलन की तैयारियों के तहत 30 जनवरी की रात्रि से ही जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें जनजाति समाज के लोगों ने भजन-कीर्तन किया। प्रातःकाल आचार्य किशनलाल जी आमेटा के नेतृत्व में रामदेव जी मंदिर में हवन हुआ, जिसमें ग्रामवासियों ने आहुति दी। इस अवसर पर रामायण एवं श्रीमद्भगवद्गीता के ग्रंथों का पूजन भी किया गया।

इसके पश्चात हजारों माताओं-बहनों द्वारा कलश यात्रा निकाली गई। रामदेव जी मंदिर प्रांगण में आयोजित धर्मसभा में संतों के उद्बोधन का श्रवण किया गया। कार्यक्रम के अंत में महाप्रसादी का आयोजन हुआ, जिसमें सभी समाज के लोगों ने सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए एक साथ भोजन प्रसाद ग्रहण किया।