उदयपुर. आनंद मार्ग प्रचारक संघ द्वारा प्रतिवर्ष 5 मार्च को दधीचि दिवस के रूप में मनाया जाता है. उदयपुर भुक्ति प्रधान डॉ. एस. के. वर्मा ने बताया की दिनांक 5 मार्च 1967 को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित आनंद नगर में आनंद मार्ग के 5 जीवनदायिनी व्यक्तियों आचार्य अभेदानंद अवधूत,आचार्य सच्चिदानंद अवधूत, भरत कुमार, प्रभाष कुमार तथा अवधेश ने मानव धर्म की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति दी थी. भागवत धर्म की स्थापना और विकास के लिए जो मानव शरीर का त्याग करते है, उन्हें दधीची कहा जाता है, क्योंकि तामसिक मानसिक प्रवृत्ति के विरुद्ध ,धर्म-अधर्म के संघर्ष में उनके दृढ़ आध्यात्मिक संकल्प के भावतरंग से धर्म की विजय सुनिश्चित होती है। इस आध्यात्मिक बलिदान को आनंदमार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने दधीची शब्द से सम्मानित करते हुए दधीचि दिवस के रूप में मनाने का निर्देश दिया था. अतः इस दिन सम्पूर्ण विश्व में आनंदमार्ग के अनुयायी भागवत धर्म की स्थापना के लिए संन्यासियों द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सूर्योदय से सूर्यास्त तक 12 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं. तत्पश्चात कीर्तन, ईश्वरप्रणिधान, स्वाध्याय तथा गुरु पूजा करते हुए उन पांच दधिचियों के सम्मान में, प्रतिज्ञा लेते हैं कि इस धरती पर, साधना, सेवा और त्याग के माध्यम से भागवत धर्म की स्थापना करते हुए, विवेकशील, नैतिकवान और समरसता युक्त, आडंबर-अंधविश्वास-क्षेत्रवाद-जातिवाद -संप्रदायवाद-भाषावाद-लिंगवाद रहित, नव्यमानवतावाद के सिद्धांत पर आधारित सदविप्र समाज का निर्माण करेंगे, जो पूरे विश्व में, आनंदमयी जीवन शैली को सुनिश्चित करेगा. आनंदमार्ग विश्व के नैतिक वादियों  को एक मंच पर आने का आह्वान करता है, विश्व बंधुत्व कायम करने का नारा देता है तथा विश्व सरकार की परिकल्पना को, लोगों के समक्ष प्रस्तुत करता है जिससे विश्व का आंतरिक अंतर्कलह और मानव नरसंहार से बचाव करते हुए, मानवता का समुचित संरक्षण और कल्याण हो सके.