उदयपुर। श्री जैन श्वेतांबर वासुपूज्य महाराज मंदिर ट्रस्ट एवं श्री चातुर्मास व्यवस्था समिति के संयुक्त तत्वावधान में मेवाड़ मोटर्स लिंक रोड स्थित दादाबाड़ी में रविवार को कृष्णगिरी पीठाधीश्वर वसंत विजयानंद गिरी महाराज एवं साध्वी डॉ. विद्युतप्रभाश्रीजी के सानिध्य में उवसग्गहरं महापूजन का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन हुआ।
महापूजन में 130 जोड़ों ने श्रद्धापूर्वक भाग लेकर आयोजन को यादगार बना दिया।
गुरुदेव वसंत विजयानंद गिरी महाराज के मुखारविंद से हुए मंत्रोच्चारों से पूरा दादाबाड़ी परिसर भक्तिमय हो उठा।शुद्ध मन से की गई पूजा का मिलता है विशेष लाभकृष्णगिरी पीठाधीश्वर वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने कहा कि जिसका मन शुद्ध और प्रसन्न होता है, प्रभु भी उससे प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे केवल पूजा करने वाले श्रद्धालु न बनें, बल्कि अपनी भक्ति के माध्यम से स्वयं को भीतर से शुद्ध करने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि पूजा करने मात्र से नहीं, बल्कि पूजा के विवेक और उसके पीछे छिपी भावना को समझने से वास्तविक लाभ प्राप्त होता है।उन्होंने बताया कि शिखरजी तक पहुंचने के आध्यात्मिक मार्ग में मंत्रोच्चार पहली सीढ़ी के समान है।
मंत्रों की सकारात्मक ऊर्जा वातावरण के साथ-साथ मन और हृदय को भी प्रभावित करती है। महापूजन से पूर्व क्षेत्रपाल सहित हजारों करोड़ देवी-देवताओं एवं योग-योगिनियों से हाथ जोड़कर पूजा की अनुमति मांगी गई।
इसके बाद विधिपूर्वक महापूजन का शुभारंभ हुआ।18 विधिकारकों ने करवाया विधिपूर्वक महापूजनआयोजन में 18 विधिकारकों ने गुरुदेव के साथ मंत्रोच्चार करते हुए विभिन्न देव शक्तियों का आह्वान किया।
वायु देवता एवं इंद्र देवता का आह्वान करते हुए वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया गया। मंत्रोच्चारों के बीच श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक उवसग्गहरं महापूजा संपन्न की।महापूजन के लिए प्रत्येक जोड़े की थाली में विशेष पूजन सामग्री रखी गई थी।
इसमें फल, फूल, कुंकुम, यंत्र, मिष्ठान, दूध, जल, दीपक, इत्र एवं अक्षत सहित विभिन्न सामग्री शामिल थी।
णमोकार महामंत्र के सामूहिक उच्चारण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।16 नदियों का जल और 25 पहाड़ों की मिट्टी रही विशेषचातुर्मास संयोजक गजेन्द्र भंसाली ने बताया कि महापूजन को विशेष स्वरूप देने के लिए विभिन्न धार्मिक सामग्री का उपयोग किया गया।
पूजन में 1008 नैवेद्य, 51 किलो अक्षत, 1008 फल, 16 नदियों का जल, 25 पहाड़ों की मिट्टी तथा विभिन्न रंगों के चावल शामिल किए गए।
18 विधिकारकों ने पूरी पूजा विधि को संपन्न कराया।मंत्रोच्चारों ने बांधा आध्यात्मिक वातावरणट्रस्ट अध्यक्ष राज लोढ़ा ने बताया कि आयोजन के दौरान संगीतकार नरेंद्र वाणीगोता ने अपनी मधुर आवाज में मंत्रोच्चार प्रस्तुत किए।
उनके मंत्रोच्चारों ने पूरे वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। गुरुदेव के दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए बाहर से करीब 500 श्रद्धालु भी दादाबाड़ी पहुंचे।
महापूजन में शामिल सभी जोड़ों ने सिर पर मुकुट धारण कर धार्मिक विधि में भाग लिया।दीक्षा लेने वाली छह बालिकाएं भी रहीं मौजूदआयोजन में अगले वर्ष दीक्षा लेने वाली छह बालिकाओं ने भी सहभागिता की।
बाड़मेर, धोरीमन्ना एवं सूरत से आई इन बालिकाओं की उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रही।
साध्वी डॉ. विद्युतप्रभाश्रीजी के साथ साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी भी इस अवसर पर मौजूद रहीं।महापूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक विधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और गुरुदेव के सानिध्य में आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।
आयोजन के समापन पर करीब एक हजार श्रद्धालुओं के लिए स्वामीवात्सल्य का आयोजन किया गया। आयोजन का लाभ लोढ़़ा एवं सेठिया परिवार ने लिया।