शाइन इंडिया फाउंडेशन ने वर्ष 2011 से, पूरे हाडोती संभाग में नेत्रदान जागरुकता,नेत्र संकलन एवं दृष्टिहीन लोगों के अधिकारों के लिए कार्य करना प्रारंभ किया ।
उस समय कोटा शहर में वर्ष में, नगण्य मात्र नेत्रदान हुआ करते थे,जिसमें भी पूरी आंख को लिया जाता था ।नेत्रदान को लेकर समाज में बढ़ती जागरूकता अब धीरे-धीरे एक नई सामाजिक परंपरा का रूप लेती दिखाई दे रही है।
अब परिवार शोक में होने के ठीक बाद शोकाकुल परिजनों द्वारा संस्था को नेत्रदान के लिए संपर्क किया जाता है ।अब नेत्रदान करने वाले परिवारों में,नेत्रदान एक परंपरा बन चुका है ।
संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन और इबीएसआर बीबीजे चैप्टर के माध्यम से छोटे-छोटे गांव ढाणियों तक भी नेत्रदान की अलख जागी है ।
इसी क्रम में, बारां शहर में इसी माह चार दिवंगतों के नेत्रदान हुए खास बात यह रही कि,इनमें से तीन परिवारों में पहले भी उनके दिवंगतों के के नेत्रदान संस्था के माध्यम से संपन्न हुए थे ।संस्था संस्थापक डॉ कुलवंत गौड़ ने बताया कि,राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के प्रथम दिन बड़नगर निवासी श्रीमती मुन्नी देवी ठाकुरिया के निधन के बाद उनके परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लिया।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उनके पति स्व. देव कुमार ठाकुरिया के निधन के उपरांत भी परिवार ने उनका नेत्रदान कराया था।परिवार ने नेत्र ज्योति मित्र हितेश खंडेलवाल से संपर्क किया, जिन्होंने कोटा स्थित शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ को सूचना दी।
सूचना मिलते ही डॉ. गौड़ तेज बारिश के बाद भी एक घंटे में कोटा से बारां पहुंचे और नेत्रदान संपन्न कराया।इसी कड़ी में एक दिन पूर्व शिवाजी कॉलोनी निवासी स्व. श्री बृजमोहन जी मंत्री के निधन के बाद उनके पुत्र राजेंद्र एवं संजय मंत्री ने पिता का नेत्रदान कराने की इच्छा व्यक्त की।
इस परिवार द्वारा पूर्व में उनकी माताजी तृप्ति देवी का भी मरणोपरांत नेत्रदान कराया जा चुका था।
इस नेत्रदान में समझ कार्यकर्ता कमलेश महेश्वरी एवं अजय पनवाड़ का सहयोग रहा ।शहर संयोजक, हितेश खंडेलवाल ने बताया कि, शोक की घटना होते ही नेत्रदान के लिए संपर्क करने जैसा प्रेरणादायक बदलाव केवल नेत्रदान के प्रति जागरूकता नहीं, बल्कि समाज में विकसित हो रहे विश्वास और सेवा संस्कार का संकेत है।
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े की शुरुआत पर सामने आई यह तस्वीर समाज के लिए बेहद सकारात्मक है।
वर्षों से किए जा रहे जागरूकता प्रयासों का वास्तविक परिणाम तब दिखाई देता है, जब एक व्यक्ति का संकल्प परिवार का संस्कार और वही संस्कार आगे चलकर परिवार की परंपरा बन जाता है।डॉ गौड़ ने यह भी बताया कि, प्रदेश में हाडोती संभाग एक ऐसा संभाग है जिसमें कोई ऐसा दिन नहीं जाता है जब नेत्रदान के विषय पर चर्चा ना हो या कहीं नेत्रदान ना हो ।
प्रतिदिन पूरे हाड़ौती संभाग में नेत्रदान का विषय चर्चा में रहता है ।