उदयपुर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान उदयपुर के ईटी प्रभाग द्वारा साइबर सेफ्टी जागरूकता के क्रम में एक विशेष वार्ता का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डी.एल.एड.) के प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्राध्यापकों को साइबर खतरों की जानकारी देना तथा उनसे बचाव के उपायों से अवगत कराना था।
ईटी सेल प्रभारी अधिकारी हरिदत्त शर्मा के अनुसार वर्तमान डिजिटल युग में इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिसके साथ ही साइबर अपराधों और खतरों की संभावनाएँ भी बढ़ गई हैं। ऐसे में भावी शिक्षक वर्ग को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता चिराग सैनानी ने छात्राध्यापकों को साइबर सुरक्षा से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार साइबर अपराधी व्यक्तिगत जानकारी, पासवर्ड, बैंकिंग विवरण और सोशल मीडिया खातों को निशाना बनाते हैं। सैनानी ने ईमेल स्पैम, फिशिंग, मैलवेयर, हैकिंग और पहचान चोरी जैसे खतरों पर प्रकाश डालते हुए उनसे बचाव के व्यावहारिक उपाय साझा किए। उन्होंने छात्रों को सुरक्षित पासवर्ड बनाने, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण अपनाने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने और नियमित रूप से सॉफ़्टवेयर अपडेट करने जैसे सरल लेकिन प्रभावी उपायों की जानकारी दी।
कार्यक्रम का शुभारम्भ डाइट प्राचार्य शीला काहाल्या ने किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान युग सूचना प्रौद्योगिकी का युग है, जहाँ शिक्षा का स्वरूप तेजी से डिजिटल हो रहा है। ऐसे में भावी शिक्षकों को न केवल स्वयं सुरक्षित रहना चाहिए, बल्कि उनमें इतनी क्षमता भी होनी चाहिए कि वे अपने विद्यार्थियों और समाज को साइबर अपराधों से बचा सकें। उन्होंने तकनीक के सकारात्मक उपयोग पर जोर देते हुए साइबर सुरक्षा को आज की अनिवार्य आवश्यकता बताया।
इस अवसर पर उपप्रधानाचार्य डॉ बृजबाला शर्मा, पीएसटीई प्रभाग से मंजु टांक और गिरीश कुमार चौबीसा, ईटी प्रभाग अध्यक्ष बीना कँवर राजपूत, डॉ. जगदीश कुमावत, गायत्री जोशी, अमृता जोशी, तेजपाल जैन और सुरेन्द्र सिंह शक्तावत, अमिता शर्मा, सत्यप्रिय, अंजलि कोठारी, दीपक सेन, किरण मास्ते भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम के दौरान छात्राध्यापकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रश्न पूछे। वार्ताकार ने उनके प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्हें व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। इस संवादात्मक शैली ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बना दिया। डाइट उदयपुर का यह प्रयास न केवल छात्राध्यापकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में सहायक रहा, बल्कि उन्हें डिजिटल युग में सुरक्षित रहने की दिशा में प्रेरित भी किया। इस प्रकार के आयोजन से भावी शिक्षक वर्ग में जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की भावना विकसित होती है।
Udaipur
डाइट उदयपुर में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का आयोजन
भावी शिक्षकों को सिखाए सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के गुर
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