राजस्थान विधानसभा में नशे की बढ़ती हुई विभीषिका के बारे में विस्तृत चर्चा हुई। यह एक चिंतनीय प्रश्न है। प्रदेश को *उड़ता पंजाब*जैसा न बनने देने हेतु निम्न सुझाव  है प्रेषित हैं।
1. हर राजकीय या गैरराजकीय शिक्षा संस्थान, यूनिवर्सिटी में वर्ष भर  में दो बार नशे के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।
2. इन कार्यक्रमों के वीडियो फोटो समाचार पत्रों एवं विभाग में मंगाए जाएं ताकि उनकी पुष्टि हो सके।
3. "नशा एक रोग है जिसका इलाज संभव है" नशे को 1956 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रोग घोषित कर दिया है। अर्थात इसका अब इलाज संभव है। इस जानकारी के अभाव में  वर्षों तक परिवार नशे के रोगी का इलाज नहीं कर पाता और उसे खो देता है।
4. हर सामाजिक संगठन को नशा मुक्ति अभियान में सक्रिय भाग लेने हेतु आग्रह करना चाहिए।
5. एन सी सी, ऐन ऐस एस , नेवल विंग इत्यादि के सभी शिविरों में नशा मुक्ति हेतु कार्यक्रम अनिवार्य करना चाहिए।
6. जन जागरण हेतु सभी जनप्रतिनिधियों इसमें अपनी आगामी पीढ़ी को नशे से बचाने हेतु सक्रिय सहभागिता हेतु आग्रह करना चाहिए।
इन सब सुझावों के क्रियान्वयन द्वारा हम राजस्थान को* उड़ता राजस्थान* बनने से बचा सकते हैं ।