उदयपुर। जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ में प्रो. मंजु मांडोत ने कार्यवाहक कुलपति का पदभार संभाल लिया है। उनका कार्यकाल ऐसे समय शुरू हुआ है, जब विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत के 14 वर्ष से अधिक लंबे कार्यकाल को लेकर नेतृत्व परिवर्तन का दौर चल रहा है।
करीब तीन दशक से विद्यापीठ से जुड़ी प्रो. मंजु मांडोत ने कंप्यूटर साइंस एवं आईटी विभाग की निदेशक सहित विभिन्न महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे एमएसडब्ल्यू कार्यक्रम में प्राचार्य तथा जन शिक्षण एवं विस्तार कार्यक्रम निदेशालय की निदेशक भी रह चुकी हैं। उन्होंने कृषि से जुड़े कार्यक्रमों में भी प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाली है। प्रो. मांडोत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय में पीएचडी की है।
पदभार संभालने के बाद प्रो. मांडोत ने कहा कि विद्यापीठ के विभिन्न विभागों और उसकी कार्यप्रणाली से वे लंबे समय से परिचित हैं। करीब 30 वर्षों के अनुभव के आधार पर वे विश्वविद्यालय को नई दिशा देने और आगे ले जाने के लिए पूरी क्षमता से कार्य करेंगी।
पूर्व कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत के 14 वर्ष से अधिक लंबे कार्यकाल के संबंध में उन्होंने कहा कि किसी भी कुलपति का इतना लंबा कार्यकाल एक बड़ी अवधि होती है। उन्होंने यूजीसी के नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुलपति के लिए सामान्यतः पांच वर्ष का कार्यकाल निर्धारित होता है और नियमों के तहत सीमित अवधि तक ही आगे कार्य करने का प्रावधान है। ऐसे में नेतृत्व में बदलाव होना स्वाभाविक था।
प्रो. सारंगदेवोत ने अपने पद से संबंधित कार्रवाई को राजस्थान उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस पर प्रो. मांडोत ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इसका निर्णय कानून के अनुसार होगा।
हाल में हुए कर्मचारी आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कुछ चिंताएं पदोन्नति, सेवा लाभ और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों से संबंधित थीं। इन मामलों की समीक्षा की जाएगी और प्रयास रहेगा कि सभी कर्मचारियों के साथ न्याय हो तथा किसी को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय के घटनाक्रम का विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। वर्तमान में लगभग 8,000 से 10,000 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है और कई विभागों में कक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं।
प्रो. मांडोत ने कहा कि उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक से जोड़ना शामिल है। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग केवल कंप्यूटर साइंस तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा, प्रबंधन, होम्योपैथी सहित लगभग सभी क्षेत्रों में इसका प्रभाव बढ़ रहा है। शिक्षा और प्रशासन में एआई के प्रभावी उपयोग से विद्यापीठ को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है।
विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति और कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में उन्होंने कहा कि उन्हें पदभार संभाले अभी कुछ ही दिन हुए हैं और उन्होंने वित्तीय रिकॉर्ड का विस्तृत अध्ययन नहीं किया है। वित्तीय व्यवस्था पहले केंद्रीकृत थी और अब अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की जा रही है। विस्तृत जांच के बाद ही वित्तीय स्थिति को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
इस बीच विश्वविद्यालय ने नियमित कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। कुलपति पद की रिक्ति विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है तथा समाचार पत्र में भी विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। प्राप्त आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
प्रो. मंजु मांडोत ने कहा कि नियमित कुलपति की नियुक्ति होने तक वे कार्यवाहक कुलपति के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगी। उनका लक्ष्य विश्वविद्यालय में शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने, कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान और विद्यापीठ को तकनीक आधारित एवं उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान के रूप में आगे बढ़ाने का रहेगा।