उदयपुर। देवेंद्रधाम में चल रही चातुर्मासिक प्रवचन माला में डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि पुण्य का परिणाम भोगते हुए भी मनुष्य को अपने वर्तमान कर्मों की शुद्धता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

पुण्य की कमाई जीवन में सुख-सुविधाएं दे सकती है, लेकिन गलत साधनों से अर्जित धन अंततः अशांति और दुख का कारण बनता है।उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपनी मेहनत और ईमानदारी की कमाई पर भरोसा रखना चाहिए।

दूसरों की कमाई देखकर उसी प्रकार धन अर्जित करने की इच्छा व्यक्ति को गलत मार्ग पर ले जा सकती है।

गलत कमाई का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार को भी प्रभावित करता है।डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने धर्म, सदाचार, संयम और पुरुषार्थ को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि व्यापार और व्यवहार में धर्म का समावेश होना चाहिए।

अच्छे कर्मों से व्यक्ति के भीतर करुणा, क्षमा और आत्मजागृति के भाव विकसित होते हैं।इस अवसर पर डॉ. राजेन्द्र मुनि ने भी धर्मसभा को संबोधित करते हुए पुण्य कर्मों की महत्ता बताई और श्रद्धालुओं को सदाचार, संयम एवं धर्ममय जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।

धर्मसभा में बठिंडा लुधियाना पानीपत दिल्ली सूरत आदि अनेक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने प्रवचन का लाभ लिया।