उदयपुर। दादावाड़ी में चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला के दौरान साध्वी डॉ. विद्युत प्रभा श्रीजी ने खरतरगच्छ दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि यह स्थापना दिवस नहीं, बल्कि उन महान आचार्यों, साधु-साध्वियों और श्रावक-श्राविकाओं को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने गच्छ परंपरा को जीवंत रखा।

उन्होंने आचार्य जिनेश्वर सूरी, छगन सागर एवं हीर सागर सूरीश्वर सहित महापुरुषों के तप-त्याग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जिन शासन विशाल बरगद के समान है और सभी सम्प्रदाय उसकी शाखाएं हैं।

साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी एवं योग रुचि श्रीजी ने भी विचार रखे। इस अवसर पर गौशाला में घास वितरण किया गया।