उदयपुर,  रेबीज एक विषाणु जनित, श्वानों में पाये जाने वाला घातक रोग है जो रेबीजग्रस्त श्वान से मनुष्यों में फैलता है। इस रोग से उदयपुर एवं राज्य को पूर्ण रूप से मुक्त करने के लिये जनसहभागिता आवश्यक है।
यह संबोधन पशुपालन मत्स्य एवं गौपालन के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने उदयपुर प्रवास के समय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान द्वारा प्रकाशित रेबीज रोग से बचाव विषयक पत्रक के विमोचन के अवसर पर दिये। शासन सचिव डॉ. शर्मा ने कहा कि रेबीज रोग नियंत्रण का एकमात्र उपाय है कि हम इस रोग के बचाव का टीका समय पर श्वानों को लगाएं। यह टीके राज्य सरकार द्वारा समस्त पशुचिकित्सा संस्थाओं में निःशुल्क लगाये जाते हैं। शासन सचिव ने बताया कि इस वर्ष 28 सितम्बर को मनाये जाने वाले विश्व रेबीज दिवस की थीम भी यही है कि “ समाज एवं समुदाय अभी से कार्य करें” अतः आमजन में जागरूकता उत्पन्न कर हम सामुदायिक रूप से अपने राज्य को इस रोग से मुक्त करने में पूर्ण सहयोग करें।
संस्थान के उपनिदेशक डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी ने बताया कि रेबीज रोग भारत ही नहीं अपितु विश्व स्तर पर एक गंभीर समस्या हैं विश्व में हजारों व्यक्तियों की मृत्यु इस रोग के कारण होती है। अतः हम सबका दायित्व है कि इस रोग से उदयपुर शहर को मुक्त बनाते हुए राज्य को इससे मुक्त करावे। शासन सचिव डॉ. समित शर्मा द्वारा किये गये इस विमोचन कार्यक्रम में डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी, डॉ. सुरेश जैन, डॉ. पदमा मील, डॉ. ओमप्रकाश साहू, डॉ. शेलेन्द्र शुक्ला, डॉ. सुरेश शर्मा, डॉ. मुकेश नागौरी, उदयपुर दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की प्रबंधक निदेशक श्रीमती विमलेश राठौड सहित कई अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
डॉ. छगाणी ने बताया कि 28 सितम्बर को विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर डॉ. पदमा मील एवं डॉ. ओमप्रकाश साहू के नेतृत्व में पशुपालन डिप्लोमा के विद्यार्थी, चेतक चौराहे से कोर्ट चौराहे तक जागरूकता रैली आयोजित कर रेबीज नियंत्रण पत्रक वितरित करेंगे।