उदयपुर, पशुओं में अंतिम तीन माह में होने वाले गर्भपात को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकी यह प्राय ब्रुसेलोसिस के कारण होता है एवं पशुओं के सम्पर्क में आने वाले मनुष्यों में भी यह रोग फैलता है। यह संबोधन राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान के उपनिदेशक डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी ने राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित खुली चर्चा में दिये।
उन्होंने बताया कि ऐसे गर्भपात का उपचार करते समय बरती गई लापरवाही के कारण पशुधन निरीक्षक एवं पशुचिकित्सक में भी इस रोग के आने की प्रबल संभावना रहती है। विभाग के अनेक पशुधन निरक्षक एवं पशु चिकित्सक इस रोग के चपेट में आ चुके है जो इलाज कराने के बाद पुर्णतः स्वस्थ है। इस साल भी वर्तमान में उदयपुर जिले के 13 गौ वंश पशुओ में ब्रुसेलोसिस रोग पाया गया है। यह एक जीवाणु जनित जूनोटिक रोग है अतः इसके प्रति सचेत एवं सतर्क रहना चाहिए। डॉ छंगाणी ने बताया कि इस रोग का पता दूध की जायें से भी लगाया जा सकता है अतः पशुपालकों को चाहिए की वे समय समय पर अपने पशुओ के दूध की जांच कराए। संस्थान की वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ पदमा भील ने बताया कि मनुष्य में इस रोग के लक्षण तेज बुखार जो कभी सामान्य कभी तेज हो जाता है, सिरदर्द, बेचैनी, वृषणो में सूजन, गर्भवती महिलाओं में गर्भपात जैसे लक्षण दिखाई देते है। जबकि पशुओ में अंतिम तिमाही में गर्भपात, तत्पश्चात बौझपन, तेज बुखार एवं दुग्ध उत्पादन में भारी गिरावट जैसे लक्षण दिखाई देते है। डॉ पदमा ने बताया कि इस रोग के बचाव का एक ही उपाय है कि 6 माह से कम आयु की बछड़ी को इस रोग के बचाव का टिका लगा दिया जाए। संस्थान के वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ ओम साहू ने बताया कि पशु में इस रोग की पुष्टि होने पर इसे अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग कर प्रजनन पर स्वस्थ होने तक पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देना चाहिए एवं सावधानी पूर्वक पशुओ के सम्पर्क में आना चाहिए। इस अवसर पर विभाग के अन्य तकनीकी कर्मचारियों ने भी अपने विचार रखे।