उदयपुर। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार की उदयपुर सौर वेधशाला (यूएसओ) ने विद्या भवन सोसाइटी के सहयोग से राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के उपलक्ष्य में विद्या भवन सभागार में एक वृहद अंतरिक्ष विज्ञान जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।कार्यक्रम का आयोजन इस वर्ष के राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के विषय “विकसित भारत की ओर नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की आकांक्षा” के अनुरूप किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तथा भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं के प्रति जागरूकता और रुचि उत्पन्न करना था।इस अवसर पर इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (एसएसी), अहमदाबाद, इसरो के रीजनल रिमोट सेंसिंग सेंटर-वेस्ट, जोधपुर, तथा उदयपुर सौर वेधशाला (यूएसओ के वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तुतियां दी।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी रही, जिसे इसरो के रीजनल रिमोट सेंसिंग सेंटर-वेस्ट, जोधपुर की टीम द्वारा आयोजित किया गया।
प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, इसके विभिन्न अनुप्रयोगों तथा अंतरिक्ष विज्ञान और अन्वेषण के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को समझने का अवसर मिला।शहर के विभिन्न विद्यालयों से लगभग 400 विद्यार्थियों और उनके शिक्षकों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
वैज्ञानिकों के साथ संवाद तथा प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों में विशेष रुचि उत्पन्न की और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे समकालीन विकास से परिचित होने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम में उदयपुर सौर वेधशाला (यूएसओ) की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत को भी रेखांकित किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित इस सौर अनुसंधान केंद्र की स्थापना डॉ. अरविंद भटनागर ने 20 सितंबर 1975 को की थी।
वर्तमान में उदयपुर सौर वेधशाला अपने स्वर्ण जयंती वर्ष का आयोजन कर रही है।पिछले पांच दशकों में उदयपुर सौर वेधशाला ने सौर अनुसंधान एवं सौर अवलोकन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वेधशाला की प्रमुख सुविधाओं और कार्यक्रमों में (एमएएसटी) मल्टी-एप्लीकेशन सोलर टेलीस्कोप) सौर दूरबीन, कैलिस्टो (सीएएलएलआईएसटीओ) सौर रेडियो अवलोकन सुविधा तथा गोंग ( ग्लोबल ऑस्सिलेशन नेटवर्क ग्रुप) कार्यक्रम शामिल हैं।यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को वैज्ञानिकों के साथ संवाद करने, भारत की अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्धियों को समझने तथा अंतरिक्ष अन्वेषण और वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति अपनी रुचि विकसित करने का एक प्रभावी मंच बना।
कार्यक्रम ने वैज्ञानिक संस्थानों और शैक्षणिक संगठनों के बीच सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया, जो विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में नई पीढ़ी को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।