उदयपुर। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् भारत की आत्मा का वह अमर स्वर है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के कठिन दौर में देशवासियों के हृदय में राष्ट्रप्रेम की अलख जगाई। इसी गौरवशाली विरासत को समर्पित एक अभिनव पहल के रूप में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष माननीय श्री वासुदेव देवनानी द्वारा वर्ष 2026 का राजस्थान विधानसभा कैलेंडर जारी किया गया है। यह कैलेंडर वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर को स्मरणीय बनाता है और राष्ट्रभक्ति, इतिहास तथा सांस्कृतिक चेतना का प्रभावशाली दस्तावेज बनकर सामने आया है।
राजस्थान विधानसभा की ओर से जारी यह विशेष कैलेंडर केवल तिथियों का संग्रह नहीं है, बल्कि वंदे मातरम् की डेढ़ सौ वर्षों की राष्ट्रयात्रा को वर्ष के प्रत्येक माह के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ता है। इसकी संकल्पना इस विचार पर आधारित है कि राष्ट्रगीत की भावना केवल किसी एक दिवस तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे वर्ष नागरिकों के जीवन में सतत रूप से बनी रहे। वर्ष के आरंभिक पृष्ठों में वंदे मातरम् को भारत माता के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आत्मगौरव के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह बताया गया है कि कैसे यह गीत राष्ट्रभावना के मूल स्रोत के रूप में उभरा और भारतीयों को अपनी मातृभूमि के प्रति चेतन किया। कैलेंडर में वंदे मातरम् के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के साहित्यिक योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। उनके कालजयी उपन्यास आनंदमठ से जन्मा यह गीत साहित्य से निकलकर राष्ट्रीय चेतना का स्वर बना। कैलेण्डर बताता है कि कैसे शब्दों की शक्ति ने जनआंदोलन को दिशा दी। जैसे-जैसे वर्ष आगे बढ़ता है, कैलेंडर वंदे मातरम् की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका को उजागर करता है। आंदोलनों, सभाओं और जुलूसों में यह गीत ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष का उद्घोष बन गया और जन-जन के हृदय में साहस का संचार करता रहा।
वंदे मातरम् : 12 महीने, 12 ऐतिहासिक तथ्य
कैलेण्डर में हर माह वंदे मातरम् के इतिहास, रचना, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका, राष्ट्रीय गीत के रूप में उसकी स्वीकृति तथा उससे जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को सरल और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया है। इससे कैलेंडर देखने वाला प्रत्येक व्यक्ति न केवल तारीखें देखता है, बल्कि हर माह राष्ट्रगीत के किसी नए पहलू से भी परिचित होता है।
जनवरी माह में वंदेमातरम् गीत के महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा किए गए प्रथम हिन्दी अनुवाद को स्थान दिया गया है। यह अनुवाद सरस्वती पत्रिका के जनवरी 1906 के अंक में प्रकाशित हुआ था।
फरवरी माह का पृष्ठ गुरूदेव रविन्द्रनाथ टैगोर द्वारा फरवरी 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में वंदेमातरम् के गायन को समर्पित है।
मार्च माह के पृष्ठ पर नेहाटी स्थित बंकिमचंद्र चट्टोपध्याय के पैतृक घर के उस कक्ष की तस्वीर प्रकाशित की गई है, जहां बैठकर बंकिमचंद्र साहित्यिक सृजन करते थे। इसके साथ ही मार्च 1876 में बंकिमचंद्र जी की ओर से की गई उस भविष्यवाणी को रेखांकित किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वंदेमातरम् गीत का वास्तविक महत्व समय के साथ ही पता चलेगा।
अप्रैल माह के पृष्ठ पर महान स्वतंत्रता सैनानी और पत्रकार महर्षि अरबिन्दो की ओर से अपनी पत्रिका बंदेमातरम् में गीत को लेकर दिए गए उद्धरण को शामिल किया है। इसमें महर्षि अरबिन्दो ने लिखा कि इस गीत से पूरी जनता ने देशभक्ति को अपने धर्म के रूप में स्वीकार कर लिया था। मां प्रकट हो चुकी थी।
मई माह के पृष्ठ में वंदेमातरम् गीत से प्रेरित होकर महान क्रांतिकारी विपिनचंद्र पाल की ओर से प्रारंभ किए गए वंदेमातरम् समाचार पत्र और उसके संबंध में लाला लाजपत राय के विचारों का उल्लेख सचित्र रूप से है।
जून माह के पृष्ठ पर भगिनी निवेदिता द्वारा जून 1905 में डिजाइन किए गए व्रज ध्वज और उस पर अंकित वंदेमातरम् के मूल में समाहित राष्ट्र चेतना की भावना को इंगित किया है।
जुलाई के पृष्ठ पर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान प्रकाशित प्रमुख समाचार पत्रों के बारे में बताया गया हैं, जिनमें वंदेमातरम् का उल्लेख और भारत माता की तस्वीरें प्रकाशित होती थी तथा ब्रिटिश सरकार द्वारा उन्हें प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया था।
अगस्त माह के पृष्ठ में वंदेमातरम् को वीरों की पुकार के रूप में दर्शाते हुए 17 अगस्त 1909 को फांसी पर चढ़ाए गए महान क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा द्वारा अंतिम उद्गार के रूप में वंदेमातरम् के उद्घोष को रेखांकित किया है।
सितम्बर से नवम्बर माह तक के पृष्ठों में वंदे मातरम् को प्राप्त राष्ट्रीय गीत की मान्यता और उसके संवैधानिक सम्मान की यात्रा को प्रस्तुत किया गया है। यह स्पष्ट करता है कि यह गीत भारत की विविधता में एकता का सबसे सशक्त प्रतीक है। इसमें सेठ गोविन्द दास और प्रो शिब्बनलाल सक्सेना द्वारा वंदेमातरम् को राष्ट्रगान बनाए जाने की पैरवी करने का जिक्र है। साथ ही 24 जनवरी 1950 को डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में दिए गए संबोधन के अंश भी शामिल किए गए हैं, जिसमें उन्होंने वंदेमातरम् को जन-गण-मन के समान ही सम्मान किए जाने की बात कही थी।
दिसम्बर माह के पृष्ठ में कालजयी राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपध्याय का पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के लालगोला से जुड़े प्रसंग को स्थान दिया गया है।
वर्तमान और भविष्य की पीढ़ी के लिए संदेश
कैलेंडर यह संदेश देता है कि वंदे मातरम् केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के लिए भी राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा है। यह कर्तव्यबोध और नागरिक जिम्मेदारी का भाव जागृत करता है। उपयोगिता की दृष्टि से भी यह कैलेंडर पूर्ण है। इसमें राष्ट्रीय पर्व, त्योहार, महत्वपूर्ण दिवस और सामान्य कैलेंडर संबंधी सभी जानकारियां सम्मिलित हैं, जिससे यह दैनिक जीवन में भी समान रूप से उपयोगी है। इसके अलावा कैलेंडर के प्रत्येक पृष्ठ पर महान स्वतंत्रता सेनानियों के प्रेरणादायी उद्धरण सम्मिलित किए गए हैं। इसमें बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद, रामप्रसाद बिस्मिल, बाल गंगाधर तिलक, अमर शहीद हेमु कालानी, मैडम भीकाजी कामा, महर्षि दयानंद सरस्वती, लाला लाजपतराय, पं मदनमोहन मालवीय जैसे महापुरुषों के विचार राष्ट्रप्रेम, कर्तव्य और त्याग की भावना को निरंतर जीवंत रखते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष की एक और दूरदर्शी पहल
विधानसभा अध्यक्ष माननीय श्री वासुदेव देवनानी विधायी संस्था में नवाचारों के लिए जाने जाते हैं। पिछले वर्ष 2025 में उन्होंने विधानसभा कैलेंडर को संविधान को समर्पित किया था। वहीं इस बार वंदेमातरम् को आधार बनाते हुए नई पहल की। यह पहल राजस्थान विधानसभा को केवल विधायी संस्था नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के संवाहक मंच के रूप में प्रतिष्ठित करती है। साथ ही यह भी दर्शाती है कि संवैधानिक संस्थाएँ केवल प्रशासनिक दायित्व ही नहीं निभातीं, बल्कि राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन की भी अहम भूमिका निभाती हैं। वंदे मातरम् के 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को समेटता राजस्थान विधानसभा कैलेण्डर - 2026 अतीत के गौरव, वर्तमान की जिम्मेदारी और भविष्य के लिए प्रेरणाओं को एक साथ जोड़ता है। यह निस्संदेह एक प्रेरणास्पद राष्ट्र दस्तावेज है।
यह भी हुए नवाचार
विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी विधानसभा में नवाचारों के लिए सतत प्रयासरत रहते हैं। दो साल के दरम्यान नेवा सॉफ्टवेयर से विधायी कार्यों का डिजिटलाइजेशन किया गया। इससे विधानसभा पेपरलेस हुई। साथ ही उन्होंने विधानसभा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर दिलाने में भी सक्रियता दिखाई। इसी के परिणाम स्वरूप प्रशासनिक जवाबदेही तय हुई, अब हर सत्र में 95 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हो रहे हैं। विधानसभा जनदर्शन से भी जुड़ रहा है। अब तक 40 हजार से अधिक आगन्तुकों ने विधानसभा एवं म्यूजियम देखा ।विधानसभा में वंदेमातरम् दीर्घा और संविधान दीर्घा भी स्थापित की गई। वहीं संसद की तर्ज पर सैन्ट्रल हॉल और वृहद ऑडिटोरियम भी बन रहा है। इसके अलावा कारगिल शौर्य वाटिका का लोकार्पण किया गया तथा वीरांगनाओं को भी सम्मानित किया गया। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान को संवाद, सहमति और सुशासन के केंद्र के रूप में स्थापित किया। भारतीय संस्कृति के अनुसरण में चेत्र शुक्ल प्रतिपदा से दैनन्दिनी प्रकाशन की शुरूआत की। युवा शक्ति को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर युवा संसद कार्यक्रम हो रहे हैं। अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला विधायकों का सम्मान की स्वच्छ पहल की। सदन का कलेवर गुलाबी नगरी की तर्ज पर गुलाबी किया गया।
Udaipur
वंदे मातरम् के 150 वर्षः राष्ट्रचेतना को सहेजता राजस्थान विधानसभा कैलेंडर-2026
महज तिथियों का संग्रह नहीं, राष्ट्रयात्रा का दस्तावेज है राजस्थान विधानसभा कैलेण्डर
Related stories
Miraj Group Celebrates 40 Years of Growth, Diversification and Trust
NATHDWARA: From its beginnings in Rajasthan in 1987 to a diversified business group with interests spanning m…
Congress Minority Department Holds Divisional Meeting in Udaipur
UDAIPUR: The Rajasthan Pradesh Congress Minority Department held a divisional meeting at Raza Garden, Alipura…
Udaipur Nagar Nigam Reservation Draw Fixes Status of All 80 Wards
UDAIPUR: The reservation lottery for all 80 wards of the Udaipur Nagar Nigam was conducted Monday as preparat…
Jio REintroduces Jio Prime with 1-year Price Guarantee A special membership to mark 10 years of Jio
· With New Jio Prime membership, customers who want additional price certainty for future can protect today's…